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जुबीन गर्ग के पुराने गीतों को बचाने की चिन्मय सैकिया की अनोखी पहल

गुवाहाटी के चिन्मय सैकिया ने दिवंगत असमिया गायक जुबीन गर्ग के दुर्लभ गीतों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की पहल की है। उन्होंने 200 से अधिक गीतों को इकट्ठा किया है, जो अब इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं। यह प्रयास न केवल जुबीन के संगीत को संरक्षित करने का है, बल्कि उस समय की याद भी दिलाता है जब कैसेट संगीत का मुख्य स्रोत थे। जानें इस अनोखी पहल के बारे में और कैसे यह क्षेत्रीय संगीत को बचाने में मदद कर रही है।
 

जुबीन गर्ग की यादें और चिन्मय सैकिया की पहल


गुवाहाटी, 19 सितंबर (वेब वार्ता)। दिवंगत असमिया गायक जुबीन गर्ग की यादें आज भी लोगों के दिलों में बसी हुई हैं, लेकिन उनके कुछ संगीत के टुकड़े समय के साथ लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं। इस संदर्भ में असम के नगांव जिले के कुंवारिटोल के निवासी चिन्मय सैकिया ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उन्होंने जुबीन के दुर्लभ और पुराने गीतों की रिकॉर्डिंग को संजोकर रखा है, जिनमें से कई अब इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं।


चिन्मय सैकिया पिछले कई वर्षों से जुबीन गर्ग के पुराने ऑडियो और वीडियो कैसेट इकट्ठा कर रहे हैं और अब उन्हें डिजिटल फॉर्मेट में सुरक्षित कर रहे हैं, ताकि भविष्य में लोग इन गीतों का आनंद ले सकें।


सैकिया ने बताया कि उन्होंने जुबीन गर्ग के 200 से अधिक गीतों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया है। इनमें से कई गीत यूट्यूब और अन्य प्रमुख म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर भी नहीं मिलते। इसलिए, इन गीतों को डिजिटल रूप में संग्रहित करना आवश्यक था, ताकि जुबीन के पुराने गीतों को संरक्षित किया जा सके, जो समय के साथ लोगों की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं।


सैकिया का यह संग्रह उस समय की याद दिलाता है, जब संगीत सुनने के लिए कैसेट एकमात्र विकल्प था। लोग अपने पसंदीदा गायकों और गीतों के कैसेट खरीदकर उन्हें घर पर सुनते थे। ऑडियो के साथ-साथ वीडियो कैसेट भी काफी लोकप्रिय थे। समय के साथ, पुराने कैसेट खराब होने लगे, उनकी आवाज में समस्या आने लगी, टेप टूटने लगे या रिकॉर्डिंग पूरी तरह से खराब हो गई। इसलिए, इन रिकॉर्डिंग को समय पर डिजिटल रूप में सुरक्षित करना बेहद जरूरी है।


जुबीन गर्ग असम के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली गायकों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने असमिया के अलावा कई अन्य भारतीय भाषाओं में भी गाने गाए और अपने संगीत से एक अलग पहचान बनाई। उनके गीतों ने पूर्वोत्तर भारत के संगीत और सांस्कृतिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया।


हालांकि जुबीन गर्ग के कई लोकप्रिय गीत आज डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं, लेकिन उनके पुराने गीतों को खोजना आसान नहीं है। विशेष रूप से वे रिकॉर्डिंग, जो सीमित संख्या में जारी किए गए कैसेट में मौजूद थीं या जिन्हें बाद में डिजिटल रूप में उपलब्ध नहीं कराया गया, उनके खो जाने का खतरा हमेशा बना रहता है। ऐसे में सैकिया जैसे संगीत प्रेमियों की व्यक्तिगत कोशिशें पुराने क्षेत्रीय संगीत को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।