जीवन: कैसे एक साधारण युवक ने बॉलीवुड में विलेन की पहचान बनाई?
जीवन का संघर्ष और सफलता
मुंबई, 23 अक्टूबर। हिंदी सिनेमा में खलनायक की भूमिका निभाने वाले कई कलाकारों में से एक, जीवन, अपने अनोखे अंदाज के लिए दर्शकों के दिलों में बसे रहे। उन्होंने न केवल खतरनाक विलेन का किरदार निभाया, बल्कि पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। हालांकि, फिल्मों में अपनी जगह बनाना उनके लिए आसान नहीं था।
जीवन ने महज 26 रुपए लेकर मुंबई की ओर कदम बढ़ाया। शुरुआत में उन्हें स्टूडियो में छोटे-मोटे काम करने पड़े, लेकिन इसी दौरान उन्हें अभिनय का अवसर मिला, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
जीवन का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को श्रीनगर में हुआ। उनका असली नाम ओमकार नाथ धर था और वे कश्मीरी पंडित परिवार से थे। उनके जन्म के समय उनकी मां का निधन हो गया था, और तीन साल की उम्र में उनके पिता भी नहीं रहे। बचपन से ही उन्हें फिल्मों और अभिनय में रुचि थी, लेकिन उनके परिवार में इस पेशे को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं था।
अभिनेता बनने की चाह ने जीवन को घर छोड़ने पर मजबूर किया। 18 साल की उम्र में, वह केवल 26 रुपए लेकर मुंबई पहुंचे, जो उस समय बंबई के नाम से जाना जाता था। यहां उनकी सबसे बड़ी चुनौती थी, फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखना और अपने जीवन यापन के लिए काम करना। उन्हें एक स्टूडियो में काम मिला, जहां वह रिफ्लेक्टर पर सिल्वर पेपर चिपकाने का काम करते थे। इस दौरान उन्हें फिल्म निर्माण की प्रक्रिया को नजदीक से देखने का मौका मिला।
यह स्टूडियो मोहनलाल सिन्हा का था। जीवन की अभिनय में रुचि को देखते हुए उन्हें पहली बार फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' में अभिनय का मौका मिला। इस अवसर ने उन्हें अभिनय की दुनिया में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया।
जीवन ने अपने करियर में विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए, लेकिन पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि की भूमिका उनकी सबसे खास पहचान बन गई। उन्होंने इस किरदार को लगभग 49 से 60 फिल्मों में निभाया, जिसमें 1950 में आई 'हर हर महादेव' विशेष रूप से याद की जाती है। इस भूमिका ने उन्हें धार्मिक फिल्मों के दर्शकों के बीच लोकप्रिय बना दिया।
बाद में, उन्होंने हिंदी सिनेमा में विलेन के किरदारों को अपनाया। उनकी संवाद अदायगी, चेहरे के भाव और किरदार को निभाने का तरीका उन्हें एक अलग पहचान दिलाने में सफल रहा। 'जॉनी मेरा नाम', 'अमर अकबर एंथनी' और 'धर्म वीर' जैसी फिल्मों में उनके काम को सराहा गया। उन्होंने कई दशकों तक फिल्मों में काम किया और विभिन्न भूमिकाओं के माध्यम से अपनी पहचान बनाई।
जीवन का निधन 10 जून 1987 को हुआ।