☰
×

जावेद अख्तर की संघर्ष की कहानी: 27 पैसे लेकर मुंबई पहुंचे थे, जानें शबाना आजमी ने क्या कहा

जावेद अख्तर, भारतीय सिनेमा के प्रसिद्ध लेखक और गीतकार, ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कठिनाइयों में की। उनकी पत्नी शबाना आजमी ने साझा किया कि कैसे जावेद ने केवल 27 पैसे लेकर मुंबई में कदम रखा और कई रातें फुटपाथ पर बिताईं। इस संघर्ष के दौरान उन्होंने कभी हार नहीं मानी। जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी और कैसे उन्होंने अपने सपनों को साकार किया।
 

जावेद अख्तर का संघर्ष




मुंबई, 4 अक्टूबर। भारतीय फिल्म उद्योग के प्रमुख लेखकों और गीतकारों में से एक जावेद अख्तर ने अपने करियर की शुरुआत बेहद कठिन परिस्थितियों में की थी। उनकी पत्नी और प्रसिद्ध अभिनेत्री शबाना आजमी ने जावेद के संघर्ष के दिनों को याद करते हुए एक पुरानी तस्वीर साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे जावेद केवल बड़े सपनों के सहारे मुंबई में टिके रहे।


शबाना ने अपने पोस्ट में लिखा, '4 अक्टूबर 1964 को, केवल 19 वर्ष की आयु में, जावेद अख्तर मुंबई के बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पर पहुंचे। उनकी जेब में सिर्फ 27 पैसे थे, लेकिन उनकी आंखों में बड़े सपने थे। मुंबई में अपनी पहचान बनाने के प्रयास में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कई रातें फुटपाथ पर बिताईं और कई बार रेलवे स्टेशन और विभिन्न स्टूडियो के परिसर में सोए। उनके पास रहने के लिए कोई निश्चित स्थान नहीं था। हालात इतने खराब हो गए थे कि एक समय ऐसा भी आया जब वह लगातार तीन दिनों तक भूखे रहे।'


शबाना ने आगे कहा, 'उस समय जावेद के पास पहनने के लिए भी ज्यादा कपड़े नहीं थे। जो कपड़े थे, वे भी बहुत खराब स्थिति में थे। ऐसे हालात में किसी के लिए भी हिम्मत बनाए रखना आसान नहीं होता, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। जब वह निराशा के करीब पहुंच गए थे और हार मानने का विकल्प उनके सामने था, तब उन्होंने खुद को समझाया कि वह इस तरह मरने के लिए नहीं आए हैं और एक दिन यह कठिनाई जरूर समाप्त होगी। समय के साथ उनकी यह बात सच साबित हुई।'


शबाना ने कहा, 'कुछ सफर लगभग कुछ भी न होने से शुरू होते हैं, बस एक सपना होता है। मैं सभी से अपील करती हूं कि कभी हार न मानें। अगर जावेद अख्तर अपने हालात बदल सकते हैं, तो कोई भी ऐसा कर सकता है।'


जावेद अख्तर ने भारतीय सिनेमा में अपनी एक अद्वितीय पहचान बनाई है। सलीम खान के साथ उनकी जोड़ी 'सलीम-जावेद' के नाम से जानी जाती है। इस जोड़ी ने 1970 और 1980 के दशक में हिंदी सिनेमा को कई ऐसी फिल्में दीं, जिन्होंने कहानी कहने के तरीके को बदल दिया। 'जंजीर', 'दीवार', 'शोले' और 'डॉन' जैसी फिल्मों की सफलता में सलीम-जावेद की लेखनी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। बाद में, जावेद ने गीतकार और शायर के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई और हिंदी सिनेमा को कई यादगार गीत दिए।


शबाना आजमी और जावेद अख्तर ने 9 दिसंबर 1984 को विवाह किया।