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छऊ नृत्य के दिग्गज पंडित श्यामा चरण पति की पुण्यतिथि: जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ

पंडित श्यामा चरण पति, छऊ नृत्य के एक प्रमुख कलाकार, की छठी पुण्यतिथि पर हम उनके जीवन और कला के प्रति उनके योगदान को याद कर रहे हैं। जानें कैसे उन्होंने इस अद्भुत नृत्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई और उनके परिवार के बारे में भी। उनकी कला और समर्पण हमेशा याद किए जाएंगे।
 

छऊ नृत्य की महक और पंडित श्यामा चरण पति का योगदान

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर। छऊ, एक अद्वितीय अर्ध-शास्त्रीय नृत्य शैली है, जो मुख्य रूप से मार्शल आर्ट्स, लोक और जनजातीय परंपराओं से प्रभावित है। यह नृत्य विशेष रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अत्यधिक प्रचलित है।


इस नृत्य को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में एक प्रमुख नर्तक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है, जिनका नाम पंडित श्यामा चरण पति है। उनकी छठी पुण्यतिथि इस गुरुवार को मनाई जाएगी। आइए, जानते हैं उनके जीवन और करियर के बारे में।


श्यामा चरण पति का जन्म 1940 में झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के ईचा गांव में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ। वे तीन भाईयों में सबसे छोटे थे और बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य में गहरी रुचि रखते थे। उन्होंने गुरु बन बिहारी आचार्य के मार्गदर्शन में नृत्य की शिक्षा ली और जमशेदपुर में कथक और भरतनाट्यम का भी अध्ययन किया।


पंडित श्यामा चरण पति को 'छऊ' की सरायकेला परंपरा के प्रमुख कलाकारों में से एक माना जाता है। वे 'छऊ' नृत्य मंडली के सदस्य रहे और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) से भी जुड़े थे। इसके अलावा, उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड की गवर्निंग बॉडी में भी कार्य किया।


उनके दो बच्चे हैं, सुस्मिता पति और देवाशीष पति। उनकी बेटी, सुस्मिता, भी एक प्रतिभाशाली छऊ नृत्यांगना हैं, जो अपने पिता की कला को आगे बढ़ा रही हैं।


छऊ नृत्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए उन्हें 2006 में 'पद्मश्री' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 29 अक्टूबर 2020 को, 80 वर्ष की आयु में रांची के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके कला के प्रति योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।