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गुलजार का जन्मदिन: जानें इस महान कवि और फिल्मकार की अनकही कहानियाँ

आज गुलजार का जन्मदिन है, और इस अवसर पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें बधाई दी है। गुलजार, जिनका असली नाम संपूरण सिंह कालरा है, ने हिंदी सिनेमा में गीत लेखन, कहानी और निर्देशन में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उनकी कविताएँ और गाने न केवल लोगों को खुश करते हैं, बल्कि उन्हें एक अद्भुत दुनिया में ले जाते हैं। जानें उनके जीवन की अनकही कहानियाँ और उनके योगदान को सिनेमा में।
 

गुलजार का जन्मदिन और जैकी श्रॉफ की शुभकामनाएँ

मुंबई, 18 अगस्त। प्रसिद्ध कवि और फिल्मकार गुलजार आज अपने जन्मदिन का जश्न मना रहे हैं। इस खास मौके पर अभिनेता जैकी श्रॉफ ने उन्हें दिल से बधाई दी।

जैकी श्रॉफ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर गुलजार की एक तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "गुलजार साहब, आपको जन्मदिन की ढेर सारी शुभकामनाएँ। आप हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।"

गुलजार, जिनका असली नाम संपूरण सिंह कालरा है, का जन्म 1934 में पंजाब के दीना क्षेत्र में हुआ था, जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। उन्होंने अपनी लेखनी और रचनात्मकता के माध्यम से सिनेमा और साहित्य की दुनिया में एक अमिट छाप छोड़ी है।

हिंदी सिनेमा में गीत लेखन से लेकर कहानी, कविता और निर्देशन तक, गुलजार ने अपनी अनोखी पहचान बनाई है।

उनकी कविताएँ न केवल खुशी का अनुभव कराती हैं, बल्कि आपको एक अद्भुत दुनिया में ले जाती हैं। 1963 की फिल्म 'बंदिनी' से लेकर 2014 की 'किल दिल' तक, गुलजार ने समय के साथ खुद को ढाला और अपने योगदान को जारी रखा।

लेखक बनने से पहले, गुलजार ने कई छोटे-मोटे काम किए। मुंबई आने के बाद, उन्होंने कार मैकेनिक के रूप में काम किया। उन्होंने बहुत कम उम्र से लिखना शुरू किया, जिसके कारण उन्हें अपने पिता से डांट भी सुननी पड़ी।

लेखन के दौरान, उन्होंने अपना पेन नेम 'गुलजार दीनवी' रखा, लेकिन बाद में केवल 'गुलजार' के नाम से जाने जाने लगे। बंटवारे के बाद, वे दिल्ली आए और बिमल रॉय के सहायक के रूप में काम किया। इसके बाद, उन्होंने म्यूजिक डायरेक्टर एस. डी. बर्मन के साथ फिल्म 'बंदिनी' के लिए गीतकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। उनका पहला गाना 'मोरा गोरा अंग लेले' था।

गुलजार ने 'आनंद', 'मेरे अपने', 'मौसम', 'माचिस', 'ओमकारा', 'कमीने', 'दिल से...', 'गुरु', 'स्लमडॉग मिलियनेयर', 'रावण', 'बंटी और बबली' जैसी फिल्मों के लिए गाने लिखे हैं। इसके अलावा, उन्होंने 'आशीर्वाद', 'आनंद' और 'खामोशी' जैसी फिल्मों के लिए संवाद और स्क्रीनप्ले भी लिखा है।