क्यों पूनम पांडे को लव कुश रामलीला में मिली मंदोदरी की भूमिका से छुट्टी? जानें पूरी कहानी!
पूनम पांडे की भूमिका पर विवाद
नई दिल्ली, 23 सितंबर। दिल्ली में आयोजित हो रही लव कुश रामलीला में पूनम पांडे को मंदोदरी का किरदार दिया गया था। लेकिन उनके इस चयन का विरोध संत समाज द्वारा किया गया। इस विरोध के चलते लव कुश रामलीला समिति ने निर्णय लिया है कि अब पूनम पांडे यह भूमिका नहीं निभाएंगी। यह किरदार अब किसी अन्य कलाकार को सौंपा जाएगा।
समिति ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए इस निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभिन्न सामाजिक वर्गों से मिली आपत्तियों के बाद यह कदम उठाया गया है।
समिति के अध्यक्ष अर्जुन कुमार और महासचिव सुभाष गोयल ने कहा कि पूनम पांडे ने समिति के आमंत्रण पर मंदोदरी का किरदार निभाने के लिए सहमति दी थी। लेकिन उनके नाम की घोषणा के बाद कई संस्थानों और समूहों से आपत्तियां आईं, जिससे रामलीला के उद्देश्य में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
गहन विचार-विमर्श के बाद समिति ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि इस वर्ष मंदोदरी का किरदार किसी अन्य कलाकार को सौंपा जाएगा। समिति ने पूनम पांडे के उज्ज्वल भविष्य की कामना की और कहा कि उन्हें इस निर्णय को समझना चाहिए।
इससे पहले, इंदौर में महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा ने भी कहा था कि पूनम पांडे इस भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मंदोदरी का चरित्र आदर्श और मर्यादा का प्रतीक है, जबकि पूनम पांडे की छवि इस पवित्रता के अनुरूप नहीं है।
कंप्यूटर बाबा ने मीडिया से बातचीत में कहा, "पूनम पांडे मंदोदरी के लिए सही नहीं हैं, वह तो शूर्पणखा के किरदार के लिए अधिक उपयुक्त लगती हैं।"
उन्होंने आयोजकों से अनुरोध किया कि पूनम पांडे को मंदोदरी की जगह कोई अन्य भूमिका दी जाए, ताकि श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो संत समाज व्यापक स्तर पर विरोध करेगा। संत समाज का मानना है कि धार्मिक आयोजनों में पात्रों का चयन सोच-समझकर होना चाहिए, क्योंकि रामलीला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आस्था और आदर्शों का मंचन है।