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क्या है फिल्म 'धड़क' की कहानी? जानें इसके 8 साल पूरे होने पर मेकर्स का खास संदेश!

फिल्म 'धड़क' ने अपने 8 साल पूरे कर लिए हैं, जो भारतीय समाज में प्रेम और जातिगत भेदभाव के मुद्दों को उठाती है। इस अवसर पर मेकर्स ने सोशल मीडिया पर एक खास संदेश साझा किया है। जानें इस फिल्म की कहानी और इसके पीछे के गहरे अर्थ के बारे में।
 

फिल्म 'धड़क' का 8 साल का सफर




मुंबई, 20 जुलाई। भारतीय समाज में प्रेम को अक्सर सामाजिक अपराध के रूप में देखा जाता है, खासकर जब प्रेमी अलग-अलग जातियों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आते हैं। 2016 में आई फिल्म 'धड़क' इसी संवेदनशील मुद्दे को उठाती है। सोमवार को इस फिल्म ने अपनी रिलीज के 8 साल पूरे कर लिए।


इस अवसर पर फिल्म के निर्माताओं ने इंस्टाग्राम पर कुछ क्लिप साझा करते हुए लिखा, "दो प्रेम करने वाले दिल, दो धड़कनें, जो हमेशा एक साथ धड़कती हैं। धड़क के 8 साल पूरे।"


राजस्थान की गलियों से शुरू होकर कोलकाता तक फैली यह कहानी दो युवाओं की है, जो एक-दूसरे के प्रति आकर्षित होते हैं और बिना किसी चिंता के अपनी नई दुनिया बसाने निकल पड़ते हैं। यह फिल्म केवल एक म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा नहीं है, बल्कि समाज में व्याप्त 'ऑनर किलिंग' की भयावह सच्चाई को भी उजागर करती है।


इस लोकप्रिय बॉलीवुड रोमांटिक ड्रामा में ईशान खट्टर और जाह्नवी कपूर (दिवंगत श्रीदेवी की बेटी) ने अपने करियर की शुरुआत की थी। शशांक खेतान द्वारा निर्देशित और धर्मा प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित, यह फिल्म 2016 की हिट मराठी फिल्म 'सैराट' का आधिकारिक हिंदी रीमेक है। हालांकि, इसका अंत मराठी फिल्म से थोड़ा भिन्न रखा गया।


फिल्म का संगीत अजय-अतुल ने तैयार किया था, जिसमें 'धड़क' का टाइटल ट्रैक और 'झिंगाट' (माराठी गाने का रीमेक) बहुत लोकप्रिय हुए। बॉक्स ऑफिस पर यह फिल्म एक बड़ी सफलता साबित हुई, जिसने वैश्विक स्तर पर शानदार कमाई की।


कहानी राजस्थान के उदयपुर में सेट है, जहां एक छोटे शहर का लड़का (ईशान) एक अमीर और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार की लड़की (जाह्नवी) से प्यार कर बैठता है। जाति और सामाजिक स्तर के अंतर के कारण उनके परिवार इस रिश्ते का विरोध करते हैं, जिसके बाद दोनों भागकर एक नई जिंदगी शुरू करते हैं। फिल्म में जातिगत भेदभाव और 'ऑनर किलिंग' जैसे गंभीर मुद्दों को भी दर्शाया गया है.