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क्या है 'धुरंधर' के डोंगा का राज? नवीन कौशिक ने साझा की दिलचस्प बातें!

फिल्म 'धुरंधर' में डोंगा का किरदार निभाने वाले नवीन कौशिक ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बीटीएस तस्वीरों के साथ अपने किरदार के बारे में कई रोचक बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि कैसे इस किरदार को गुस्से और भावनाओं से भरा गया। इसके अलावा, उन्होंने अपने बॉडी डबल का भी आभार व्यक्त किया, जिसने एक्शन सीक्वेंस को सफल बनाया। जानें इस फिल्म के पीछे की प्रेरणादायक कहानी और नवीन के संघर्ष के बारे में।
 

नवीन कौशिक का डोंगा किरदार और फिल्म 'धुरंधर'

मुंबई, 11 जनवरी। आदित्य धर द्वारा निर्देशित हिट फिल्म 'धुरंधर' में रहमान डकैत के खास साथी 'डोंगा' का किरदार निभाने वाले अभिनेता नवीन कौशिक ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बीटीएस तस्वीरों के साथ एक महत्वपूर्ण सीन का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस सीन को सफल बनाने में किसका योगदान रहा।

फिल्म के हर किरदार ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है, और डोंगा के रोल को दर्शकों से काफी सराहना मिली। नवीन ने अपने इंस्टाग्राम पर बीटीएस तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि डोंगा का किरदार गुस्से और भावनाओं से भरा हुआ था।

उन्होंने एक खास सीन के बारे में बताते हुए कहा, "सारा गुस्सा एक पल में स्क्रीन पर प्रकट हुआ। यह वह क्षण था जिसने डोंगा के किरदार को पूरी तरह से परिभाषित किया। और हां, रिकॉर्ड के लिए बता दूं कि डोंगा को गोली नहीं लगी थी। हमजा ने रियर व्यू मिरर से गोली चलाई थी। यह हमजा बहुत ही बेकार आदमी है!"

नवीन ने अपने बॉडी डबल शेख बुरहानुद्दीन सीरुद्दीन का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने कठिन स्टंट्स को बेहतरीन तरीके से अंजाम दिया और एक्शन सीक्वेंस को सफल बनाया। उन्होंने कहा, "फिल्म में कुछ खतरनाक स्टंट्स के लिए डोंगा का बॉडी डबल भी था, जहां मुझ पर भरोसा नहीं किया जा सकता था, वहां उन स्टंट्स को शानदार तरीके से किया गया। शेख बुरहानुद्दीन सीरुद्दीन भाई, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद! आपने मेरे साथ मिलकर डोंगा के एक्शन सीक्वेंस को सफल बना दिया।"

एक पूर्व पोस्ट में, नवीन ने बताया था कि फिल्म से पहले उनकी स्थिति बहुत खराब थी। वह फिल्म इंडस्ट्री छोड़ने का विचार कर रहे थे। लगातार रिजेक्शन और कास्टिंग में जवाब न मिलने से उनका आत्मविश्वास टूट चुका था।

ऐसे समय में, निर्देशक मुकेश के कहने पर उन्होंने आदित्य धर से मुलाकात की। यह उनकी आखिरी उम्मीद थी। कहानी सुनने के बाद आदित्य धर ने उन पर विश्वास जताया। इस विश्वास ने उन्हें नया उत्साह दिया और वे काम पर लौट आए। उन्होंने इस फिल्म को अपनी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक बना दिया।