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क्या है 'दम मारो दम' गाने का विवाद? जानें इस आइकॉनिक ट्रैक की कहानी

फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का गाना 'दम मारो दम' विवादों में घिर गया था। इस गाने में जीनत अमान को हिप्पी स्टाइल में दिखाया गया था, जिससे नशे के कल्चर को बढ़ावा देने के आरोप लगे। जानें इस आइकॉनिक ट्रैक की कहानी और इसके पीछे के विवादों के बारे में।
 

फिल्म इंडस्ट्री में विवादास्पद गाने


मुंबई, 19 मार्च। वर्तमान में फिल्म उद्योग में बोल्ड लिरिक्स और अश्लील इशारों वाले गाने चर्चा का विषय बने हुए हैं। बादशाह का 'टटीरी' और नोरा फतेही-संजय दत्त का 'सरके चुनर' जैसे गाने विवादों में फंसे, सोशल मीडिया पर आलोचना का सामना किया और कई प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए। हालांकि, यह कोई नई घटना नहीं है। हिंदी सिनेमा के इतिहास में भी ऐसे गाने रहे हैं, जिन पर भारी हंगामा हुआ और प्रतिबंध लगाया गया। एक प्रमुख उदाहरण है 1971 की हिट फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' का प्रसिद्ध गाना।


हम बात कर रहे हैं 'दम मारो दम' की, जो देव आनंद और जीनत अमान पर फिल्माया गया था। इस गाने को आशा भोसले ने गाया था और इसमें आरडी बर्मन का संगीत और आनंद बख्शी के बोल थे। गाने में जीनत अमान को हिप्पी स्टाइल में चिलम पीते हुए दिखाया गया था, जो नशे के कल्चर को एक तरह से ग्लैमराइज करता था। इस पर गंभीर आरोप लगे कि यह भारतीय संस्कृति के खिलाफ है और युवाओं में नशे को बढ़ावा देता है।


फिल्म 'हरे रामा हरे कृष्णा' की कहानी का मुख्य उद्देश्य उस समय के हिप्पी कल्चर और नशे की बुरी आदतों पर कटाक्ष करना था। कहानी में देव आनंद (प्रशांत) अपनी बहन को खोजते हुए काठमांडू पहुंचते हैं, जहां उनकी बहन जीनत अमान पूरी तरह हिप्पी लाइफस्टाइल में डूबी हुई होती है। वह नशे में डूबी रहती है और अपने परिवार को भूल चुकी है। हालांकि, गाने के कारण फिल्म को विवादों का सामना करना पड़ा।


सूत्रों के अनुसार, गाने के विवाद ने इतना तूल पकड़ा कि ऑल इंडिया रेडियो ने इसे बैन कर दिया। दूरदर्शन ने फिल्म के प्रसारण के दौरान इस गाने को काट दिया। जब फिल्म टीवी पर प्रसारित हुई, तो 'दम मारो दम' को पूरी तरह हटा दिया गया।


दिलचस्प बात यह है कि आशा भोसले को इस गाने के लिए बेस्ट प्लेबैक सिंगर फीमेल का पुरस्कार भी मिला था। देव आनंद ने इसे एंटी-ड्रग संदेश के रूप में प्रस्तुत किया था, लेकिन गाने की आकर्षक धुन और बोल्ड विजुअल्स ने इसे एक अलग पहचान दिलाई।