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क्या है 'द इंडिया हाउस' में सई मांजरेकर का अनोखा अनुभव? जानें इस पैन-इंडिया फिल्म की चुनौतियाँ!

सई मांजरेकर अपनी नई पैन-इंडिया फिल्म 'द इंडिया हाउस' में काम कर रही हैं, जो हिंदी और तेलुगु में एक साथ शूट की जा रही है। उन्होंने इस फिल्म के दौरान द्विभाषी शूटिंग की चुनौतियों और अपने किरदार 'सती' के बारे में बात की। सई का कहना है कि इस तरह की फिल्मों में काम करना न केवल रोमांचक है, बल्कि यह कई भावनात्मक और मानसिक चुनौतियों से भरा होता है। जानें उनके अनुभव और इस फिल्म की खासियतें!
 

सई मांजरेकर का 'द इंडिया हाउस' का अनुभव




मुंबई, 5 फरवरी। भारतीय सिनेमा की पैन-इंडिया फिल्मों में काम करना न केवल रोमांचक है, बल्कि यह कई चुनौतियों से भरा भी होता है। इस समय, अभिनेत्री सई मांजरेकर अपनी आगामी पैन-इंडिया पीरियड ड्रामा फिल्म 'द इंडिया हाउस' में व्यस्त हैं। यह फिल्म हिंदी और तेलुगु दोनों भाषाओं में एक साथ शूट की जा रही है। सई का कहना है कि इस प्रकार की फिल्म में काम करने के लिए कलाकार को हमेशा भावनात्मक और मानसिक रूप से तैयार रहना आवश्यक होता है।


सई मांजरेकर ने कहा, "'द इंडिया हाउस' मेरे लिए एक अनूठा अनुभव रहा है। जब एक ही दृश्य को दो भाषाओं में शूट किया जाता है, तो कलाकार को भाषा की लय, भावनाओं और गहराई को समझना पड़ता है। कई बार एक ही दृश्य को पहले एक भाषा में और तुरंत बाद दूसरी भाषा में करना होता है, जिससे कलाकार को हर समय सतर्क रहना पड़ता है।"


उन्होंने आगे कहा, "ऐसी फिल्मों में अभिनय का तरीका थोड़ा भिन्न होता है। यहां केवल शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं के माध्यम से कहानी को आगे बढ़ाना होता है। हर भाषा की अपनी एक संवेदना होती है, और उसी के अनुसार किरदार की भावनाएं भी बदलती हैं। ऐसे में कलाकार को अपने अभिनय को बार-बार ढालना पड़ता है, ताकि किरदार हर भाषा में उतना ही वास्तविक लगे।"


सई ने यह भी बताया कि उनकी पिछली फिल्म 'मेजर' का अनुभव इस फिल्म में काफी मददगार साबित हुआ। उन्होंने कहा, "उस फिल्म ने मुझे द्विभाषी फिल्मों की शूटिंग के बारे में समझने में मदद की। हालांकि, हर प्रोजेक्ट की अपनी विशेषताएं और चुनौतियां होती हैं। 'द इंडिया हाउस' की कहानी और उसका ऐतिहासिक संदर्भ इसे अन्य फिल्मों से अलग बनाता है।"


'द इंडिया हाउस' में सई मांजरेकर 'सती' नाम की महिला का किरदार निभा रही हैं। इस पर उन्होंने कहा, "सती का किरदार निभाने के लिए मुझे उस समय के माहौल, सोच और भावनाओं को गहराई से समझना पड़ा। सती बाहर से शांत दिखती है, लेकिन उसके भीतर साहस, दर्द और संघर्ष छिपा है। इन भावनाओं को बिना ज्यादा शब्दों के दर्शकों तक पहुंचाना मेरे लिए एक बड़ी जिम्मेदारी है।"


सई ने पैन-इंडिया फिल्मों की खासियत बताते हुए कहा, "ऐसे प्रोजेक्ट्स में काम करने का सबसे अच्छा पहलू टीमवर्क होता है। सेट पर विभिन्न राज्यों और भाषाओं से आए कलाकार और तकनीशियन एक साथ काम करते हैं। सबका लक्ष्य कहानी को ईमानदारी से पर्दे पर उतारना होता है। यह सामूहिक भावना कलाकार को और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है।"


उन्होंने अपने सह-कलाकार निखिल सिद्धार्थ, निर्देशक वामसी और पूरी टीम की सराहना की। सई ने कहा, "सेट पर काम करने का माहौल बहुत सकारात्मक और कहानी पर केंद्रित रहता है। जब निर्देशक और पूरी टीम कहानी को लेकर गंभीर होते हैं, तो कलाकार भी अपने किरदार में और गहराई से उतर पाता है।"