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क्या है 'चरक: फेयर ऑफ फेथ' पर सेंसर बोर्ड का विवाद? जानें निर्देशक सुदीप्तो सेन की बातें

निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपनी आगामी फिल्म 'चरक: फेयर ऑफ फेथ' को लेकर सेंसर बोर्ड की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि कैसे कुछ फिल्मों को बिना किसी रुकावट के सर्टिफिकेट मिल जाता है, जबकि उनकी फिल्म को कठिन समीक्षा प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। 'चरक' एक लोककथा-आधारित थ्रिलर है, जो अंधविश्वास और धार्मिक अनुष्ठानों पर आधारित है। जानें इस विवाद के पीछे की कहानी और सुदीप्तो का दृष्टिकोण।
 

सुदीप्तो सेन का सेंसर बोर्ड पर सवाल


मुंबई, 26 फरवरी। फिल्म निर्देशक सुदीप्तो सेन ने अपनी नई फिल्म 'चरक: फेयर ऑफ फेथ' को लेकर सेंसर बोर्ड की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब 'एनिमल' और 'धुरंधर' जैसी फिल्मों को बिना किसी रुकावट के सर्टिफिकेट मिल जाता है, तो फिर 'चरक' को इतनी कठिन समीक्षा प्रक्रिया से क्यों गुजरना पड़ता है।


सुदीप्तो ने आरोप लगाया कि यह स्थिति केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड और सरकारी प्रक्रियाओं में भेदभाव को दर्शाती है। उन्होंने कहा, ''हम इस मुद्दे पर पहली बार नहीं बोल रहे हैं। 2013-2014 से हम विभिन्न मंचों पर इस भेदभाव के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। एक ओर, हिंसा और विवादित दृश्यों वाली फिल्मों को आसानी से मंजूरी मिल जाती है, जबकि सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर सवाल उठाने वाली फिल्मों को बार-बार जांच का सामना करना पड़ता है।''


उन्होंने इसे सिस्टम का डबल स्टैंडर्ड बताया और कहा कि हमें अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। 'द केरल स्टोरी' के समय भी हमें इसी तरह के विवादों का सामना करना पड़ा था।


फिल्म 'चरक: फेयर ऑफ फेथ' एक लोककथा-आधारित थ्रिलर है, जो भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचलित अंधविश्वास और कठोर धार्मिक अनुष्ठानों पर आधारित है। इसे शिलादित्य मौलिक ने निर्देशित किया है और सुदीप्तो सेन ने प्रोड्यूस किया है। कुछ दृश्यों के कारण इसे सीधे सर्टिफिकेट नहीं मिला और इसे रिव्यू कमेटी के पास भेजा गया।


सुदीप्तो का कहना है कि उनकी फिल्म किसी धर्म का अपमान नहीं करती, बल्कि आस्था के नाम पर होने वाली गलत गतिविधियों पर सवाल उठाती है। उनका मानना है कि सिनेमा का उद्देश्य समाज में मौजूद हिंसक प्रथाओं को उजागर करना है।