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क्या स्वीडन का किताबों पर जोर देना है भविष्य की शिक्षा का नया ट्रेंड?

स्वीडन ने हाल ही में स्कूलों में स्क्रीन-आधारित शिक्षा के स्थान पर पारंपरिक किताबों और पेन-पेपर पढ़ाई को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। इस कदम का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है, जिसमें उन्होंने हाइब्रिड शिक्षा प्रणाली के महत्व पर जोर दिया है। जानें इस निर्णय के पीछे की वजह और इसके संभावित प्रभाव के बारे में।
 

स्वीडन ने डिजिटल शिक्षा को कहा अलविदा


मुंबई, 25 मार्च - वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ओर बढ़ रही है, स्वीडन ने एक अनोखा कदम उठाते हुए स्कूलों में स्क्रीन-आधारित शिक्षा के स्थान पर पारंपरिक किताबों और पेन-पेपर पढ़ाई को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। यह कदम बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है।


फिल्म निर्देशक सुभाष घई ने इस विषय पर अपनी राय साझा की। उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक नोट में लिखा, "स्वीडन सरकार ने स्कूलों में स्क्रीन क्लास के स्थान पर किताबों से पढ़ाई शुरू करने का निर्णय लिया है। छात्रों को सही तरीके से पढ़ाई में कठिनाई हो रही थी। अधिक स्क्रीन टाइम से ध्यान भटकता है और लिखने की आदत कमजोर होती है, जो अगली पीढ़ी के लिए चिंता का विषय है।"


घई ने सुझाव दिया कि कक्षाओं में स्क्रीन और किताबों का संतुलित उपयोग किया जाना चाहिए, यानी एक हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाना चाहिए। पूरी तरह से डिजिटल या पूरी तरह से पारंपरिक प्रणाली के बजाय, दोनों का सही मिश्रण अधिक लाभकारी होगा।


स्वीडन उन देशों में से एक है, जहां लंबे समय से डिजिटल शिक्षा का प्रचलन रहा है। यहां के स्कूलों में किताबों की जगह कंप्यूटर, स्मार्ट क्लासरूम और टैबलेट का उपयोग किया जाता था। सरकार का मानना था कि जब छात्र स्कूल से बाहर निकलेंगे, तो उन्हें तकनीकी दुनिया में तालमेल बैठाने में मदद मिलेगी। इसी कारण से धीरे-धीरे किताबें स्कूलों से गायब होने लगीं।


हालांकि, लगातार स्क्रीन पर काम करने से बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा, जिसके चलते सरकार ने किताबों के उपयोग को फिर से बढ़ावा देने का निर्णय लिया।


स्वीडन सरकार का यह निर्णय दुनिया के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश है। भले ही एआई और डिजिटल टूल्स का विकास हो रहा हो, लेकिन बुनियादी शिक्षा में किताबों, लिखने और ध्यान केंद्रित करने का महत्व अभी भी सर्वोपरि है।