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क्या समाज जल्दी में हीरो या विलेन बना देता है? जीत की नई फिल्म में है ये सवाल!

बंगाली अभिनेता जीत की नई फिल्म 'केउ बोले बिप्लोबी, केउ बोले डकैत' समाज की सोच पर गहरा सवाल उठाती है। क्या हम जल्दी में किसी को हीरो या विलेन बना देते हैं? जीत ने इस विषय पर अपनी राय साझा की है। फिल्म अनंत सिंह के जीवन पर आधारित है, जो एक क्रांतिकारी और डाकू के रूप में देखे जाते हैं। जानें इस फिल्म की कहानी और जीत की युवा पीढ़ी के प्रति सकारात्मक सोच।
 

जीत की नई फिल्म और समाज की सोच




मुंबई, 11 अगस्त। बंगाली सिनेमा के मशहूर अभिनेता जीत एक नई कहानी लेकर आए हैं, जिसमें एक ही व्यक्ति के प्रति समाज की धारणा में भिन्नता दिखाई देती है। कुछ लोग उसे क्रांतिकारी मानते हैं, जबकि अन्य उसे अपराधी समझते हैं। इसी संदर्भ में जीत ने समाज की इस प्रवृत्ति पर अपनी राय साझा की।


एक इंटरव्यू में जीत ने बताया कि आजकल लोग किसी व्यक्ति की पूरी कहानी या उसके हालात को समझे बिना ही अपनी राय बना लेते हैं।


जीत ने कहा, "मैं मानता हूं कि समाज अक्सर लोगों को जल्दी हीरो या विलेन की श्रेणी में डाल देता है। इसका मुख्य कारण समय की कमी है। आजकल लोगों के पास हर चीज के लिए बहुत कम समय है, जिससे वे किसी घटना या व्यक्ति को गहराई से समझने के बजाय त्वरित निर्णय लेने की प्रवृत्ति में हैं।"


उन्होंने युवा पीढ़ी के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण भी व्यक्त किया, खासकर जेनजी और आने वाली पीढ़ियों की तारीफ की। जीत ने कहा, "आज की पीढ़ी समझदार और स्मार्ट है। मैं खुद युवा पीढ़ी के साथ रहता हूं और उनके विचारों को करीब से समझता हूं।"


जीत की आगामी फिल्म 'केउ बोले बिप्लोबी, केउ बोले डकैत' इसी तरह के मुद्दों को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत करती है। यह फिल्म क्रांतिकारी अनंत सिंह के जीवन पर आधारित एक बायोग्राफिकल एक्शन ड्रामा है। फिल्म का शीर्षक दर्शाता है कि एक व्यक्ति को देखने का नजरिया हर किसी के लिए अलग हो सकता है।


पथिकृत बसु द्वारा निर्देशित यह फिल्म 1960 के दशक के कोलकाता की पृष्ठभूमि पर आधारित है। कहानी अनंत सिंह के रहस्यमय व्यक्तित्व और उनके कार्यों को उजागर करती है, जिनकी वजह से समाज दो धड़ों में बंटा हुआ नजर आता है। कुछ लोग उनकी साहसिक डकैतियों को अपराध मानते हैं, जबकि अन्य इसे अन्याय और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के रूप में देखते हैं।


फिल्म में इंस्पेक्टर दुर्गा रॉय अनंत सिंह को पकड़ने की कोशिश करते हैं। कहानी विभिन्न समय के बीच आगे बढ़ती है और अनंत सिंह के अतीत को भी उजागर करती है। वह स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान मास्टरदा सूर्य सेन के साथ काम करने वाले निडर स्वतंत्रता सेनानी के रूप में नजर आते हैं। आजादी के बाद, परिस्थितियों में बदलाव के कारण वह भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ एक नई लड़ाई शुरू करते हैं।


इस फिल्म में जीत के साथ तोता रॉय चौधरी, कौशिक सेन, रजत दत्त, चंदन सेन, लोकनाथ डे और मिमी चक्रवर्ती भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं।