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क्या राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं? सुप्रीम कोर्ट ने दी कड़ी चेतावनी!

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उनके व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उन्हें बार-बार रकम जमा करने के लिए मौके दिए, लेकिन आदेशों का पालन नहीं हुआ। अब उन्हें अंतिम मौका दिया गया है। जानें इस मामले की पूरी कहानी और आगे की सुनवाई में क्या हो सकता है।
 

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती

नई दिल्ली, 5 अक्टूबर। चेक बाउंस के मामले में दोषी पाए गए बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की परेशानियाँ एक बार फिर बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को अभिनेता के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की।


चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा कि राजपाल यादव को बार-बार रकम जमा करने के लिए अवसर दिए गए, लेकिन उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया।


सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को उसकी राशि का कुछ हिस्सा वापस मिलने की उम्मीद में राजपाल यादव के मामले में नरमी बरती गई है।


सीजेआई सूर्य कांत ने कहा कि यदि शिकायतकर्ता को पैसे वापस मिलने की उम्मीद नहीं होती, तो अदालत अभिनेता की सजा के खिलाफ दायर अपील को खारिज करने पर विचार कर सकती थी। कोर्ट ने राजपाल यादव को आदेश का पालन करने के लिए मंगलवार तक का अंतिम मौका दिया है। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को होगी।


यह मामला लंबे समय से चल रहे सात चेक बाउंस मामलों से संबंधित है। राजपाल यादव ने 2010 में अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग 5 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता ली थी। फिल्म की असफलता के बाद, रकम लौटाने को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।


शिकायतकर्ता के अनुसार, 2012 में हुए एक समझौते में राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और उनकी कंपनी ने ब्याज सहित लगभग 11 करोड़ रुपए लौटाने पर सहमति जताई थी। इसके बाद 2013 में राजपाल यादव ने 1.05 करोड़ रुपए के सात चेक दिए, लेकिन ये चेक बाउंस हो गए।


इसके बाद मुरली प्रोजेक्ट्स ने चेक बाउंस के सात अलग-अलग मामले दर्ज कराए। अप्रैल 2018 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी ठहराया और उन्हें छह महीने की सजा सुनाई। मामला सेशंस कोर्ट और फिर दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा। कई वर्षों तक इस मामले में सजा पर रोक, भुगतान और समझौते की कोशिशें चलती रहीं। दिल्ली हाई कोर्ट ने जुलाई 2026 में राजपाल यादव की दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सभी मामलों में तीन-तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई।


फरवरी 2026 में भी राजपाल यादव को जेल जाना पड़ा था। दिल्ली हाई कोर्ट ने बार-बार भुगतान के आश्वासन पूरे नहीं होने पर उनकी सजा पर मिली राहत हटा दी थी और उन्हें जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने उस समय कहा था कि उन्हें कई मौके दिए जा चुके हैं, लेकिन शिकायतकर्ता कंपनी को भुगतान करने के वादे पूरे नहीं किए गए।


इसके बाद राजपाल यादव ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 8 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें सरेंडर से अंतरिम राहत दी थी, लेकिन इसके लिए कोर्ट की रजिस्ट्री में 5 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त रखी गई थी।


15 सितंबर को जब मामला फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो राजपाल यादव ने रकम जमा करने के लिए और समय मांगा। कोर्ट ने उन्हें अंतिम मौका देते हुए दो हफ्ते में 2 करोड़ रुपए जमा करने और बाकी रकम के भुगतान के लिए ठोस प्रस्ताव देने को कहा। साथ ही सरेंडर से मिली अंतरिम राहत को 5 अक्टूबर तक बढ़ा दिया गया था।


अब सोमवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर राजपाल यादव के भुगतान और कोर्ट के आदेशों के पालन को लेकर सख्त रुख अपनाया है.