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क्या रजत बेदी की अपील से बदलेंगे माता-पिता की सोच? जानें उनकी खास बातें

अभिनेता रजत बेदी ने इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर माता-पिता से अपील की है कि वे अपनी बेटियों को समान अवसर दें। उन्होंने कहा कि लड़कियों को अपने जीवन के फैसले खुद लेने की आजादी मिलनी चाहिए। रजत ने यह भी बताया कि अगर उन्हें महिला सशक्तीकरण पर आधारित फिल्म में काम करने का मौका मिले, तो वह एक ऐसी लड़की की कहानी चुनेंगे जो पढ़ाई करना चाहती है, लेकिन समाज के विरोध का सामना कर रही है। उनके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होती है।
 

रजत बेदी का संदेश: बेटियों को दें समान अवसर

मुंबई, 11 अक्टूबर। अभिनेता रजत बेदी ने इंटरनेशनल गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर लड़कियों के माता-पिता के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया। उन्होंने सभी अभिभावकों से अनुरोध किया कि वे अपनी बेटियों और बेटों के साथ समान व्यवहार करें और लड़कियों को अपने जीवन से जुड़े निर्णय स्वयं लेने की स्वतंत्रता दें।


रजत ने कहा, ''मैं यह कहना चाहता हूं कि किसी बेटी को यह साबित करने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए कि वह बेटों के समान सक्षम है। उसे भी उतनी ही स्वतंत्रता, अच्छी शिक्षा और प्रोत्साहन मिलना चाहिए जितना कि बेटों को मिलता है। केवल लड़की होने के कारण यह निर्णय न लें कि वह क्या कर सकती है और क्या नहीं। उसे गलतियों का सामना करने दें, उनसे सीखने दें और अपने जीवन का मार्ग स्वयं चुनने का अवसर दें।''


उन्होंने आगे कहा, ''मैं सभी पिताओं से यह कहना चाहूंगा कि बेटी का समर्थन करना केवल उसकी सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि उस पर विश्वास करना और उसे आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास देना भी है। हर लड़की को यह अवसर मिलना चाहिए।''


जब रजत से पूछा गया कि यदि उन्हें महिला सशक्तीकरण पर आधारित किसी फिल्म में काम करने का मौका मिले, तो वह किस प्रकार की कहानी चुनेंगे, उन्होंने उत्तर दिया, ''मैं एक ऐसी लड़की की कहानी का हिस्सा बनना चाहूंगा, जो पढ़ाई करना चाहती है, लेकिन उसे अपने आस-पास के लोगों की सोच और विरोध का सामना करना पड़ता है। मेरा मानना है कि बदलाव की शुरुआत शिक्षा से होती है। जब किसी लड़की को पढ़ाई का अवसर मिलता है, तो वह अपने जीवन में आगे बढ़ने की अधिक संभावनाएं देख पाती है और अपने निर्णय लेने के लिए बेहतर तरीके से तैयार होती है।''


रजत ने कहा, ''मैं ऐसी कहानी प्रस्तुत करना चाहूंगा, जिसमें लड़की के संघर्ष के साथ-साथ उसके आस-पास के लोगों की सोच में बदलाव को भी दर्शाया जाए। कभी-कभी किसी एक व्यक्ति का समर्थन बच्चे की जिंदगी में बड़ा परिवर्तन ला सकता है। यदि किसी फिल्म को देखने के बाद कुछ माता-पिता अपनी बेटियों के प्रति अपनी सोच में बदलाव लाते हैं, तो मैं उस फिल्म को सफल मानूंगा। बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देना, उनकी पसंद का सम्मान करना और उन्हें अपने निर्णय स्वयं लेने के लिए प्रेरित करना अत्यंत आवश्यक है।''