क्या माधुरी दीक्षित ने ट्रोलिंग के बारे में खोला राज? जानें उनके अनुभव
माधुरी दीक्षित का अनुभव: ट्रोलिंग और स्टारडम
मुंबई, 4 नवंबर। मशहूर अभिनेत्री माधुरी दीक्षित वर्तमान में मराठी क्विज शो 'कौन होणार करोड़पति' में गेस्ट के रूप में दिखाई दे रही हैं। इस शो में उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में आलोचना और ट्रोलिंग के बदलते स्वरूप के बारे में चर्चा की।
शो के एक विशेष एपिसोड में शिव ठाकरे और गौतमी पाटिल ने भी भाग लिया। माधुरी ने 90 के दशक में अपने स्टारडम के दौरान ट्रोलिंग के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि अपने करियर के शुरुआती दिनों में वह मैगजीन में एक्टर्स पर टिप्पणियां किया करती थीं। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उस समय की ट्रोलिंग सोशल मीडिया की तुलना में काफी अलग थी।
शिव ठाकरे ने माधुरी से पूछा कि इतने वर्षों तक लोकप्रिय रहने के बावजूद वह कैसे जमीन से जुड़ी रहीं और ट्रोलिंग के प्रभाव से खुद को कैसे बचाया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों के लिए थोड़ी सी प्रसिद्धि भी संभालना मुश्किल हो जाता है।
इस पर माधुरी ने उत्तर दिया कि उनके काम के प्रति प्रेम ने उन्हें ध्यान केंद्रित रखने में मदद की और उन्होंने नकारात्मक टिप्पणियों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया। उन्होंने कहा, "मुझे अपने काम से गहरा लगाव था और मैं जो भी करती हूं, उसे दिल से करती हूं। इसलिए मैंने कभी ट्रोलिंग पर ध्यान नहीं दिया। हां, उस समय कुछ मैगजीन थीं जो सेलेब्स के बारे में टिप्पणी करती थीं, लेकिन वह आज के सोशल मीडिया की तरह नहीं था, जहां इतनी अधिक ट्रोलिंग होती है।"
उन्होंने आगे कहा, "हमें अपने काम से प्यार करना चाहिए और हमारी नीयत अच्छी होनी चाहिए। इसके अलावा और कुछ मायने नहीं रखता।"
गौरतलब है कि माधुरी ने 1984 में फिल्म 'अबोध' से अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद वह हिंदी सिनेमा की सबसे प्रसिद्ध अभिनेत्रियों में से एक बन गईं। 'तेजाब', 'राम लखन', 'दिल', 'साजन', 'मृत्युदंड', 'बेटा', 'हम आपके हैं कौन..!', 'दिल तो पागल है' और 'देवदास' जैसी फिल्में उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं। माधुरी का करियर पांच दशकों से अधिक लंबा रहा है।