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क्या पहनावा और खान-पान पर बहस जरूरी है? रजा मुराद ने साझा की अपनी राय

बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने हाल ही में पहनावे और खान-पान पर चल रही बहस पर अपनी राय साझा की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन आत्म-नियंत्रण भी जरूरी है। रजा ने विवादों में पड़ने के बजाय काम और समाज सेवा के माध्यम से पहचान बनाने की सलाह दी। जानें उन्होंने इस मुद्दे पर और क्या कहा है।
 

रजा मुराद की बेबाक राय




लखनऊ, 30 अगस्त। देश में हिजाब, आउटफिट और व्यक्तिगत पसंद को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के हालिया आदेश ने इस मुद्दे को कानूनी से राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया है। बॉलीवुड में भी समय-समय पर पहनावे को लेकर विवाद उठते रहते हैं। इस संदर्भ में, वरिष्ठ अभिनेता रजा मुराद ने अपनी स्पष्ट राय व्यक्त की।


उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर किसी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन इसके साथ आत्म-नियंत्रण भी आवश्यक है। उनका मानना है कि विवादों में पड़ने के बजाय, लोगों को अपने कार्यों और समाज सेवा के माध्यम से पहचान बनानी चाहिए।


रजा मुराद से बातचीत के कुछ महत्वपूर्ण अंश:


सवाल: ड्रेस को लेकर चल रही बहस पर आपकी क्या राय है? इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद यह मुद्दा और भी गरमा गया है।


जवाब: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यूनिफॉर्म में हिजाब नहीं पहनना चाहिए। यह लोकतंत्र है, और यदि किसी को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह सुप्रीम कोर्ट जा सकती है। हमें सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।


सवाल: क्या आपको लगता है कि हम लोगों के पहनावे को जरूरत से ज्यादा चर्चा का विषय बना रहे हैं?


जवाब: विवादों को बढ़ावा देना आजकल एक आम बात बन गई है। मैं मानता हूं कि चर्चा में रहने के लिए काम और समाज सेवा के जरिए पहचान बनानी चाहिए, न कि किसी की बुराई करके। यह व्यक्तिगत मामला है कि कौन क्या पहनता है।


सवाल: क्या पहनावा और खान-पान किसी व्यक्ति के निजी जीवन का हिस्सा होना चाहिए?


जवाब: यह मेरी व्यक्तिगत पसंद है और मुझे इसे जीने का पूरा अधिकार है। मेरे पहनावे और खान-पान पर किसी को टिप्पणी करने का अधिकार नहीं है।


सवाल: हाल ही में बॉलीवुड में भी ड्रेस को लेकर कई विवाद हुए हैं। आप इनको किस नजरिए से देखते हैं?


जवाब: कुछ विवाद जानबूझकर पैदा किए जाते हैं। हर किसी को अपनी बात कहने का अधिकार है, लेकिन हमें अपनी सीमाएं भी जाननी चाहिए।


सवाल: क्या आपको लगता है कि आज विवाद में बने रहना, काम के जरिए चर्चा में रहने से आसान हो गया है?


जवाब: अपने काम पर ध्यान दें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाएं। यह महत्वपूर्ण है कि हम किसके पहनावे या खान-पान पर चर्चा कर रहे हैं।