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क्या 'द केरला स्टोरी 2' सिर्फ़ प्रोपेगैंडा है? जानें इस फिल्म की सच्चाई!

विपुल अमृतलाल शाह की नई फिल्म 'द केरला स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड' ने दर्शकों का ध्यान खींचा है। यह फिल्म तीन दोस्तों की कहानी है, जो धर्म और राजनीति के मुद्दों पर आधारित है। क्या यह फिल्म समाज का सही चित्रण करती है या यह केवल एक प्रोपेगैंडा है? जानें इस फिल्म की सच्चाई और इसके पीछे के संदेश के बारे में।
 

द केरला स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड का परिचय


विपुल अमृतलाल शाह की नई फिल्म "द केरला स्टोरी 2: गोज़ बियॉन्ड" ने पिछले भाग की सफलता के बाद दर्शकों का ध्यान खींचा है। जबकि पहली फिल्म ने केवल केरल पर ध्यान केंद्रित किया था, इस बार कहानी राजस्थान और मध्य प्रदेश तक फैली हुई है। ट्रेलर में जो कुछ दिखाया गया था, वह फिल्म में और भी गहराई से प्रस्तुत किया गया है। क्या यह फिल्म वास्तव में समाज का सही चित्रण करती है या यह केवल एक प्रोपेगैंडा है? आइए इस पर विस्तार से चर्चा करें।


कहानी का सार

फिल्म तीन दोस्तों की यात्रा को दर्शाती है: सुरेखा (उल्का गुप्ता), दिव्या (अदिति भाटिया), और नेहा (ऐश्वर्या ओझा)। दिव्या, जो राजस्थान की रहने वाली है, को रील बनाना पसंद है, लेकिन उसके परिवार को यह पसंद नहीं है। एक दिन, वह राशिद नाम के एक लड़के से मिलती है, जो उसे शादी के बाद रील बनाने की आज़ादी देने का वादा करता है।


तीन लड़कियों की कहानी

यह विश्वास करना कठिन है कि कोई व्यक्ति फिल्म के लिए अपना धर्म बदल सकता है, लेकिन फिल्म में ऐसा ही दिखाया गया है। सुरेखा, जो एक पढ़ी-लिखी लड़की है और UPSC की तैयारी कर रही है, सलीम से प्यार करती है, जो खुद को लिबरल बताता है। वहीं, नेहा, जो मध्य प्रदेश की एथलीट है, अपने बॉयफ्रेंड के सपनों में फंस जाती है। इन तीनों की कहानी में आगे क्या होता है, यह जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर 'द केरला स्टोरी 2' देखनी होगी।


फिल्म की समीक्षा

फिल्म का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कैसे इन लड़कियों का 'ब्रेनवॉश' किया जाता है। लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या मेकर्स यह दिखाना चाहते हैं कि पढ़ी-लिखी लड़कियों में 'दिमाग' की कमी होती है। फिल्म का उद्देश्य सिनेमा बनाना नहीं, बल्कि अपना एजेंडा थोपना है। पिछले भाग की सफलता ने निर्माताओं को और भी अधिक आत्मविश्वास दिया है।


नफ़रत का प्रचार

फिल्म में मुस्लिम समुदाय को हर दूसरे फ्रेम में नकारात्मक रूप में दिखाया गया है। राजस्थान के लड़के का परिवार लड़की को केवल 'बच्चे पैदा करने वाली मशीन' बनाना चाहता है। मध्य प्रदेश के लड़के की माँ प्रॉस्टिट्यूशन रैकेट चला रही है। फिल्म में एक मर्डर के बाद, पूरा परिवार बॉडी के टुकड़ों को दफनाने निकल पड़ता है। विपुल शाह ने एक बार फिर से एक धर्म को कटघरे में खड़ा किया है।


फिल्म का संदेश

फिल्म में एक सीन में सुरेखा अपने परिवार से कहती है कि 'WhatsApp यूनिवर्सिटी' की बातें सच नहीं होतीं, लेकिन उसके पिता का जवाब यह है कि 'WhatsApp पर सारी जानकारी झूठी नहीं होती।' यह फिल्म आज के युवाओं के लिए नहीं है, बल्कि उन माता-पिता के लिए है जो अपने बच्चों के लिए चिंतित हैं।


अभिनय की गुणवत्ता

उल्का गुप्ता ने बेहतरीन अभिनय किया है, जबकि अदिति भाटिया ने रील गर्ल के रूप में ओवरएक्टिंग की है। ऐश्वर्या ओझा ने नेहा के किरदार में थोड़ी मासूमियत दिखाई है।


देखें या न देखें?

यदि आप राजनीति और धर्म पर आधारित मसाला फिल्में पसंद करते हैं, तो यह फिल्म आपके लिए हो सकती है। लेकिन यदि आप सिनेमा में तर्क और भाईचारे की तलाश करते हैं, तो इस फिल्म से दूर रहना बेहतर होगा।


निष्कर्ष

'द केरला स्टोरी 2' एक ऐसी फिल्म है जो यह संदेश देती है कि सभी अच्छे मुसलमान या तो मर चुके हैं या केवल APJ अब्दुल कलाम ही थे। यदि आप अपने उन रिश्तेदारों को खुश करना चाहते हैं जो सोशल मीडिया पर नफरत फैलाते हैं, तो उन्हें यह फिल्म दिखाएं।