क्या जानते हैं आप शक्ति सामंत और उत्तम कुमार की अनकही कहानी 'अमानुष' की शूटिंग के बारे में?
शक्ति सामंत की यादें और 'अमानुष' की शूटिंग
मुंबई, 9 अप्रैल। सिनेमा की दुनिया में कई ऐसे सितारे रहे हैं जिनकी क्लासिक फिल्में आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम शक्ति सामंत का है, जिन्होंने 'कश्मीर की कली', 'अमानुष' और 'हावड़ा ब्रिज' जैसी यादगार फिल्में बनाई।
शक्ति सामंत का निधन 9 अप्रैल 2009 को हुआ था। एक साक्षात्कार में उन्होंने अपनी 1975 में आई फिल्म 'अमानुष' के बारे में दिलचस्प बातें साझा की थीं। इस फिल्म की शूटिंग और बंगाली सुपरस्टार उत्तम कुमार के साथ हुई बातचीत आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है।
उन्होंने बताया कि विभाजन के बाद फिल्म उद्योग की स्थिति बहुत खराब थी। कई कलाकार और संगीतकार पाकिस्तान चले गए थे, जिससे कई फिल्में अधूरी रह गईं। शक्ति सामंत ने कहा कि कहानी का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है और उसमें भावनाएं होनी चाहिए। बिना भावनाओं की कहानी जल्दी भुला दी जाती है। पुराने समय की फिल्मों में गहरी भावनाएं होती थीं, जो दर्शकों को बार-बार देखने पर मजबूर कर देती थीं।
'अमानुष' शक्ति सामंत की पसंदीदा फिल्मों में से एक थी, जिसमें उत्तम कुमार और शर्मिला टैगोर ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। फिल्म की कहानी में एक नया दृष्टिकोण था और सभी कलाकारों ने बेहतरीन अभिनय किया। सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इसकी शूटिंग सुंदरबन के घने जंगलों में की गई थी, जो कोलकाता से काफी दूर है। वहां रॉयल बंगाल टाइगर भी मौजूद थे। शक्ति सामंत ने लगभग 150 लोगों के लिए रहने और खाने-पीने का प्रबंध किया था। दिन में बाघों का खतरा और शाम को सांपों का डर था, फिर भी शूटिंग को बड़े उत्साह और मेहनत से पूरा किया गया।
उन्होंने कहा, "मैं खुद बाघ देखना चाहता था, कई बार जंगल में गया लेकिन बाघ नहीं मिला। सुंदरबन में मधुमक्खियों और शहद के छत्तों की भरपूर मात्रा होती है। लकड़ी काटने वाले लोग छत्ते खोजते हैं और बाघ चुपचाप उनके पीछे रहता है। जब लोग शहद खाने के लिए मुंह ऊपर करते हैं, तो बाघ झपट्टा मारकर उन्हें उठा ले जाता है।"
'अमानुष' फिल्म को बंगाली और हिंदी दोनों भाषाओं में बनाया गया था। उस समय उत्तम कुमार हिंदी फिल्मों में संघर्ष कर रहे थे। उनकी एक फिल्म असफल हो गई थी और नक्सली गतिविधियों के कारण उन्हें धमकियां मिली थीं, जिसके बाद वह मुंबई आए। शक्ति सामंत से उनकी गहरी दोस्ती थी। दोनों शाम को साथ बैठते थे। एक दिन उत्तम कुमार ने शक्ति सामंत से पूछा, "क्या मैं फिर से हिंदी फिल्म में काम कर सकता हूं?" शक्ति सामंत ने कहा, "अगर अच्छा विषय मिला तो जरूर।"
जब 'अमानुष' की कहानी मिली, तो शक्ति सामंत ने इसे उत्तम कुमार को सुनाया। कहानी उन्हें बहुत पसंद आई। शक्ति सामंत की एक शर्त थी कि फिल्म हिंदी और बंगाली दोनों में बनेगी। उत्तम कुमार ने पूछा, "क्या डर लगता है?" शक्ति सामंत ने उत्तर दिया, "डर नहीं लगता, लेकिन आप बंगाली सुपरस्टार हैं। आपकी पिछली हिंदी फिल्म नहीं चली, इसलिए दोनों वर्जन बनाने से जोखिम कम होगा।" उत्तम कुमार ने सहमति दी और कहा कि हिंदी संवादों की स्क्रिप्ट पूरी दे दीजिए ताकि सेट पर कोई गलती न हो।
शक्ति सामंत ने बीएससी की पढ़ाई की थी, जब फिल्म उद्योग में आना आम बात नहीं थी। उनके परिवार में ज्यादातर लोग इंजीनियर थे, लेकिन उन्हें फिल्मों का बहुत शौक था। स्कूल के इंटरवल में मिले पैसे से वह एक पैसा बचाकर रविवार को मैटिनी शो देखने जाते थे।