क्या जम्मू-कश्मीर में फिर से बढ़ रहा है कट्टरपंथ? अशोक पंडित की चिंता ने मचाई हलचल
अशोक पंडित की चिंता: जम्मू-कश्मीर में बढ़ते प्रदर्शनों पर प्रतिक्रिया
मुंबई, 7 मार्च। फिल्म निर्माता और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक पंडित ने जम्मू-कश्मीर में हो रहे प्रदर्शनों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से भारत सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
पंडित ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट में लिखा कि 1990 से लेकर 2026 तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की याद दिलाते हुए कहा कि आज भी इस्लामिक कट्टरपंथ का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को 'तथाकथित' करार देते हुए देश की एकता को खतरे में बताया।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, "हमें इन तथाकथित ‘प्रदर्शनकारियों’ और उनके समर्थकों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए, जो भारत की स्वतंत्रता को बाधित करना चाहते हैं। मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि समय रहते कार्रवाई करें।"
पंडित ने 1990 के नारों का उल्लेख करते हुए कहा, "हमें क्या चाहिए? आजादी! आजादी का क्या मतलब है? ला इलाहा इल्लल्लाह! यहां क्या चलेगा? निजाम-ए-मुस्तफा!" और “अरे काफिरों, कश्मीर में छोड़ दो! कश्मीर पाकिस्तान बनेगा।”
उन्होंने 2026 के संदर्भ में नए नारों का जिक्र करते हुए कहा, “कश्मीर हिज्बुल्लाह बनेगा।” पंडित ने कहा कि कश्मीर की अधिकांश जनसंख्या सड़कों पर है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी सहित कोई स्थानीय नेता इसकी निंदा नहीं कर रहा है। घाटी और लद्दाख में हो रहे बड़े पैमाने पर हिंसक प्रदर्शनों पर चुप्पी साधी गई है। उन्होंने लाल चौक पर ईरानी झंडा फहराने को हिम्मत का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह बहुत कुछ दर्शाता है।
पंडित ने जोर देकर कहा, "वे तब भी चुप थे, वे अब भी चुप हैं। हम अपने देश के खिलाफ इस हिंसक प्रदर्शन को चुपचाप नहीं देख सकते।"
उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि 90 के दशक में कश्मीर में नरसंहार और जातीय सफाए का शिकार होने के नाते, वे सरकार से अपील करते हैं कि जम्मू और कश्मीर ही नहीं, पूरे देश में इस खतरे से निपटने के लिए कदम उठाए जाएं, ताकि आंतरिक सुरक्षा बनी रहे।