क्या 'चौहान' फिल्म ने इतिहास को तोड़ा? अजय देवगन के खिलाफ उठी आवाजें
अजय देवगन की 'चौहान' पर विवाद
लखनऊ, 1 जुलाई। हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध अभिनेता अजय देवगन की नई एक्शन फिल्म 'चौहान' का टीजर रिलीज होते ही विवादों में आ गया है। इसी संदर्भ में क्षत्रिय परिषद के सह-संस्थापक अभिषेक आनंद ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस टीजर पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि 'चौहान' फिल्म एक पत्थरबाजी की घटना पर आधारित है, लेकिन इसमें इस्तेमाल किए गए संवाद दो समुदायों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने वाले हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि पठानों को इस तरह से निशाना बनाया जाता है, तो क्या कश्मीर में पठान रहते हैं? असल में, पठान तो अफगानिस्तान में होते हैं। अगर ऐतिहासिक संवाद डालना था, तो राजा मानसिंह के किरदार का उपयोग करना चाहिए था।
अभिषेक ने बताया कि राजा मानसिंह का ध्वज पंचरंगा था, जिसे उन्होंने अफगानिस्तान के पठानों की पांच जनजातियों को हराने के बाद अपने ध्वज में शामिल किया था। उन्होंने यह भी कहा कि बॉलीवुड की यह आदत रही है कि वह इतिहास को गलत तरीके से प्रस्तुत करता है। 'चौहान' के संवादों में न तो कोई तार्किकता है और न ही कोई सच्चाई।
उन्होंने यह भी कहा कि बॉलीवुड जब भी जरूरत होती है, क्षत्रिय और राजपूत पहचान का इस्तेमाल करता है, लेकिन जब ऐतिहासिक फिल्म बनाने की बात आती है, तो गलत जानकारी पेश करता है। उन्होंने अजय देवगन की फिल्म 'तान्हाजी' का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें उदयभान के किरदार को गलत तरीके से दर्शाया गया।
अभिषेक ने बॉलीवुड के एजेंडा सेटिंग के तरीकों पर भी चर्चा की और कहा कि बॉलीवुड दो तरीकों से एजेंडा सेट करता है, जैसे 'तान्हाजी' और 'जोधा-अकबर' के माध्यम से। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बॉलीवुड के निर्देशक कभी भी बाबू कुंवर सिंह और धर्मन बाई पर फिल्म क्यों नहीं बनाते हैं?
उन्होंने बताया कि धर्मन बाई, जो एक मुस्लिम गायिका थीं, ने 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में बाबू कुंवर सिंह के साथ अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी। इस तरह की कहानियाँ बॉलीवुड को पसंद नहीं आतीं। बॉलीवुड को केवल वही कहानियाँ पसंद हैं जो उनके एजेंडे में फिट बैठती हैं। उन्होंने कहा कि हमारे इतिहास को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है और बॉलीवुड को सही इतिहास को पर्दे पर लाना चाहिए।