क्या 'कयामत से कयामत तक' के गाने थे कमजोर? आनंद-मिलिंद ने सुनाया अनसुना किस्सा
फिल्म 'कयामत से कयामत तक' का अनकहा सच
मुंबई, 10 जुलाई। आमिर खान और जूही चावला की चर्चित फिल्म 'कयामत से कयामत तक' के गाने जैसे 'पापा कहते हैं', 'ऐ मेरे हमसफर' और 'गजब का है दिन' आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं। लेकिन एक समय ऐसा था जब फिल्म को रिलीज से पहले ही इंडस्ट्री ने लगभग खारिज कर दिया था। अब, चार दशकों बाद, संगीतकार जोड़ी आनंद-मिलिंद ने उस समय का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है।
म्यूजिक रियलिटी शो 'इंडियन आइडल' में पहुंचे आनंद-मिलिंद ने 1988 में आई 'कयामत से कयामत तक' से जुड़ी कई यादें साझा कीं। शो में कंटेस्टेंट अंशिका चोंकर और तनिष्क शुक्ला ने फिल्म का एक प्रसिद्ध गाना गाया, जिसके बाद दोनों संगीतकारों ने फिल्म के निर्माण से लेकर उसकी सफलता तक के कई रोचक किस्से सुनाए।
आनंद ने बताया कि फिल्म के ट्रायल शो के दौरान डिस्ट्रीब्यूटर्स ने इसे खरीदने से मना कर दिया था। उनका कहना था कि फिल्म का संगीत बहुत कमजोर और धीमा है, जो दर्शकों को पसंद नहीं आएगा। उस समय की सोच थी कि केवल तेज और जोशीले गाने ही हिट हो सकते हैं। अंततः नासिर हुसैन को फिल्म को खुद रिलीज करना पड़ा।
आनंद ने कहा, 'किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म हिंदी सिनेमा की सबसे यादगार फिल्मों में से एक बनेगी। रिलीज के बाद दर्शकों का प्यार ने सभी आलोचनाओं को गलत साबित कर दिया। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और इसके गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए।'
फिल्म की रिलीज के बाद आनंद ने बांद्रा के गैएटी-गैलेक्सी थिएटर में दर्शकों की प्रतिक्रिया देखने का अनुभव साझा किया। उन्होंने देखा कि कई कॉलेज के छात्र सिर्फ गाने देखने के लिए आते थे और गाने खत्म होते ही बाहर निकल जाते थे। उन्हें पता होता था कि कौन-सा गाना कब आएगा।
शो के दौरान जज और रैपर बादशाह ने आनंद से पूछा कि उनकी सदाबहार धुनों के पीछे प्रेरणा क्या थी। आनंद ने बताया कि उनके पिता चित्रगुप्त जी से उन्हें प्रेरणा मिली और 1960 का दशक उनके लिए सबसे बड़ा प्रेरणास्त्रोत था।
उन्होंने कहा, 'कयामत से कयामत तक के लिए संगीत बनाना हमारे लिए कठिन नहीं था क्योंकि पूरी टीम में संगीत की अच्छी समझ थी। इस फिल्म में सब कुछ नया था। नया हीरो, नई हीरोइन और नए निर्देशक। मंसूर खान ड्रम और पियानो बजाते थे, और जब निर्देशक को संगीत की समझ होती है, तो काम करना आसान हो जाता है।'