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क्या इंद्रजीत लंकेश की नई फिल्म 'जय हिंद, जय सिंध' में छिपा है सिंधी समुदाय का दर्द?

निर्देशक इंद्रजीत लंकेश अपनी नई फिल्म 'जय हिंद, जय सिंध: ए लव स्टोरी' के माध्यम से विभाजन के समय सिंधी समुदाय के दर्द को उजागर कर रहे हैं। यह फिल्म एक युवा जोड़े की प्रेम कहानी के साथ-साथ तीन पीढ़ियों की यात्रा को दर्शाती है। इंद्रजीत का मानना है कि सिंधी संस्कृति की समृद्धि और उनकी पुरानी भूमि की वापसी का मुद्दा आज भी प्रासंगिक है। जानें इस फिल्म में क्या खास है और इसके पीछे का संदेश क्या है।
 

इंद्रजीत लंकेश की नई फिल्म का अनावरण




मुंबई, 12 अगस्त। निर्देशक इंद्रजीत लंकेश अपनी नई फिल्म 'जय हिंद, जय सिंध: ए लव स्टोरी' के साथ दर्शकों के सामने आ रहे हैं। इस फिल्म में विभाजन के समय सिंधी समुदाय के अनुभवों को दर्शाया गया है।


उन्होंने बताया कि यह कहानी एक युवा जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है, जो प्यार और बंटवारे के संदर्भ में विकसित होती है। फिल्म तीन पीढ़ियों की यात्रा को भी दर्शाती है। इसमें महेश मांजरेकर, जयाप्रदा, इंदिरा तिवारी, राहुल देव और विक्रम कोचर जैसे प्रमुख कलाकार शामिल हैं।


इंद्रजीत ने कहा, "यह फिल्म प्यार की कहानी है, लेकिन इसके पीछे का संदेश सिंधी समुदाय के दर्द को उजागर करता है, जो उन्होंने विभाजन के दौरान सहा।"


निर्देशक ने आगे कहा, "हम इस फिल्म के माध्यम से उस दुखद इतिहास को सामने लाएंगे, जिसमें कई लोगों ने अपनी संपत्ति, परिवार और प्रियजनों को खो दिया। विभाजन के समय, कई लोग पाकिस्तान से भारत आए, और उनमें से एक सिंधी समुदाय भी था।"


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिल्म उन सवालों पर केंद्रित है, जो सिंधी समुदाय आज भी खोज रहा है, क्योंकि उनकी पूर्वजों की भूमि अब पाकिस्तान में है। "बंटवारे से पहले, वे भारतीय थे और आज भी हैं। उनके दादा-दादी की यादें और संपत्ति अब पाकिस्तान में हैं। यह भारतीय इतिहास का एक दुखद अध्याय है।"


इंद्रजीत ने सिंधी संस्कृति की समृद्धि के बारे में भी बात की और कहा, "सिंधी समुदाय अपनी पुरानी भूमि वापस चाहता है, जो मेरा मानना है कि भारत का हिस्सा है। सूफी संगीत की शुरुआत भी सिंधियों ने की थी। अगर मैं इतिहास को बदल सकता, तो मैं चाहता कि सिंध को भारत में वापस लाया जाए।"