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क्या आप जानते हैं मीनाक्षी शेषाद्रि ने 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' को नए अंदाज में कैसे पेश किया?

मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने क्लासिक गाने 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' को एक नए वीडियो के माध्यम से फिर से जीवित किया है। 1985 की फिल्म 'मेरी जंग' से यह गाना दर्शकों के दिलों में बसा हुआ है। नए वीडियो में मीनाक्षी का लुक और आत्मविश्वास दर्शकों को आकर्षित कर रहा है। जानें इस वीडियो में क्या खास है और कैसे उन्होंने इस गाने को नए अंदाज में पेश किया है।
 

मीनाक्षी शेषाद्रि का नया वीडियो

मुंबई, 4 सितंबर। प्रसिद्ध अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने अपने लोकप्रिय गाने 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' को एक नए तरीके से प्रस्तुत कर पुरानी यादों को ताजा कर दिया है। यह गाना 1985 में रिलीज हुई फिल्म 'मेरी जंग' का है, जिसे दर्शकों ने बेहद पसंद किया था। अब, लगभग चार दशकों बाद, मीनाक्षी ने इस गाने का एक नया वीडियो साझा किया है, जिसमें उनका लुक पहले से काफी अलग है। वीडियो के रिलीज होते ही फैंस के बीच उस समय की यादें फिर से जीवित हो गई हैं।


मीनाक्षी ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें वह 'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' पर फिर से अपनी यादों को जीते हुए नजर आ रही हैं। इस बार उनका पहनावा काफी बदला हुआ है। जहां फिल्म के मूल गाने में मीनाक्षी लाल रंग की खूबसूरत ड्रेस में थीं, वहीं नए वीडियो में उन्होंने काली लेदर जैकेट, सफेद टॉप और नीली जींस पहनी है। वीडियो में उनका आत्मविश्वास और गाने के साथ तालमेल दर्शकों का ध्यान आकर्षित कर रहा है।


वीडियो के साथ मीनाक्षी ने कैप्शन में लिखा, ''बारिश के इस मौसम में मुझे इस खूबसूरत रोमांटिक गाने से जुड़ी प्यारी यादें आ रही हैं। उस समय मुंबई के समुद्री किनारे पर भारी बारिश में इस गाने की शूटिंग हुई थी। कोरियोग्राफी जादुई थी। मैंने इस बार गाने को थोड़ा सहज तरीके से पेश किया है।''


'ओ मेरे ख्वाबों के शहजादे' गाने को अनुराधा पौडवाल ने गाया था, जबकि इसका संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था और गीत आनंद बख्शी ने लिखा था। सुभाष घई द्वारा निर्देशित 'मेरी जंग' में मीनाक्षी के साथ अनिल कपूर भी मुख्य भूमिका में थे।


फिल्म की कहानी अरुण शर्मा (अनिल कपूर) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके माता-पिता दीपक वर्मा (गिरीश कर्नाड) और आरती (नूतन) एक खुशहाल जीवन जीते हैं। लेकिन एक दिन, शक्तिशाली वकील जी. डी. ठकराल (अमरीश पुरी) अपने प्रभाव और धन के बल पर दीपक वर्मा पर झूठा आरोप लगवाता है। इस अपमान को सहन न कर पाने के कारण अरुण के पिता की मृत्यु हो जाती है। इसके बाद, अरुण वर्मा एक सक्षम वकील बनता है और अपने पिता की मौत का बदला लेने की ठान लेता है। वह कोर्ट में ठकराल को उसकी ही चालों से चुनौती देता है।