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क्या आप जानते हैं महानायक उत्तम कुमार की जयंती पर पीएम मोदी ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में महानायक उत्तम कुमार को याद किया। उन्होंने उनके अभिनय कौशल और समाजसेवा के प्रति समर्पण की सराहना की। पीएम मोदी ने उत्तम कुमार की जयंती पर उनके जीवन के संघर्ष और उपलब्धियों को साझा किया। जानें इस महान अभिनेता के बारे में और उनकी फिल्मों की खासियत।
 

पीएम मोदी ने उत्तम कुमार को किया याद




मुंबई, 30 अगस्त। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो शो 'मन की बात' में बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता उत्तम कुमार को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके अभिनय कौशल, व्यक्तित्व और संघर्ष की सराहना की।


पीएम मोदी ने कहा, "जल्द ही, 3 सितंबर को, हम महानायक उत्तम कुमार की जन्म-शताब्दी मनाएंगे। वह एक बहुआयामी अभिनेता थे, जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। फिल्म प्रेमियों का मानना है कि सत्यजीत रे ने 'नायक-द हीरो' की स्क्रिप्ट उत्तम कुमार को ध्यान में रखकर लिखी थी। सत्यजीत रे ने उनके अद्भुत भावनात्मक गहराई और गरिमा की प्रशंसा की।"


उन्होंने उत्तम कुमार की समाजसेवा के प्रति समर्पण का भी उल्लेख किया। पीएम मोदी ने कहा, "उत्तम कुमार की जिंदगी हमें यह सिखाती है कि कभी हार नहीं माननी चाहिए। उनकी शुरुआती फिल्में सफल नहीं रहीं, लेकिन उन्होंने अपने काम पर ध्यान केंद्रित रखा, जिसका फल उन्हें मिला।"


प्रधानमंत्री ने उत्तम कुमार से जुड़ी एक व्यक्तिगत याद साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे वह कोलकाता में रोड शो के दौरान उनके घर के पास से गुजरे थे और वहां एक व्यक्ति ने उन्हें उत्तम कुमार की तस्वीर भेंट की थी। उन्होंने कहा, "मैं एक बार फिर महानायक को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। वे हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे।"


उत्तम कुमार का जन्म 3 सितंबर 1926 को कोलकाता में हुआ था, और उनका असली नाम अरुण कुमार चट्टोपाध्याय था। उन्होंने 1948 में 'दृष्टिदान' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की।


हालांकि, उनके शुरुआती काम में सफलता नहीं मिली, लेकिन धीरे-धीरे उनकी जोड़ी सुचित्रा सेन के साथ बेहद लोकप्रिय हो गई। दोनों ने कई यादगार फिल्में कीं, जिनमें 'सप्तपदी', 'हरानो सुर', और 'सागरिका' शामिल हैं।


उत्तम कुमार ने केवल रोमांटिक हीरो की छवि तक सीमित नहीं रहे, बल्कि 'नायक' में एक फिल्म स्टार की भूमिका निभाई, जो अपने करियर और निजी जीवन पर विचार करता है। इसके अलावा, उन्होंने 'चिरियाखाना', 'झिंदेर बंदी', और 'अमानुष' जैसी फिल्मों में भी विविध किरदार निभाए।


उन्होंने निर्देशन और निर्माण में भी कदम रखा और बंगाली सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। उनका निधन 24 जुलाई 1980 को हुआ।