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क्या आप जानते हैं 'फरिश्ते' फिल्म के 35 साल पूरे होने पर अनिल शर्मा ने क्या कहा?

फिल्म 'फरिश्ते' के 35 साल पूरे होने पर निर्देशक अनिल शर्मा ने अपनी पुरानी यादें साझा की हैं। उन्होंने इस अवसर पर फिल्म के प्रमुख कलाकारों और इसके गानों का जिक्र किया। जानें इस एक्शन-ड्रामा फिल्म की कहानी और इसके हिट गाने, जो आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं।
 

अनिल शर्मा ने साझा की 'फरिश्ते' की यादें

मुंबई, 22 फरवरी। हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध निर्देशक, निर्माता और लेखक अनिल शर्मा ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी फिल्म 'फरिश्ते' के 35 साल पूरे होने का जश्न मनाया। उन्होंने इस अवसर पर अपनी पुरानी यादों को ताजा करते हुए एक पोस्ट साझा किया।

अनिल शर्मा ने फिल्म के कुछ पोस्टर्स को साझा करते हुए किरदारों को याद किया और लिखा, "'फरिश्ते' के 35 साल... साहस, भाईचारे और नियति की एक कहानी। जब दिग्गज कलाकार एक साथ आए, तो सिनेमा ने जीवन से भी बड़ा रूप ले लिया। समय बीतता है, लेकिन महानता हमेशा बनी रहती है।"

उन्होंने आगे कहा, "धरम जी, विनोद जी, श्रीदेवी जी और सदाशिव जी हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे।"

यह एक्शन-ड्रामा फिल्म 'फरिश्ते' 22 फरवरी 1991 को रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन अनिल वर्मा ने किया था। इस फिल्म में धर्मेंद्र, विनोद खन्ना, श्रीदेवी और रजनीकांत जैसे दिग्गज कलाकारों ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इसके अलावा, जया प्रदा, स्वप्ना, कुलभूषण खरबंदा और सदाशिव अमरापुरकर जैसे कलाकारों ने भी अपने बेहतरीन अभिनय का प्रदर्शन किया।

1991 में आई यह फिल्म आज भी दर्शकों के दिलों में बसी हुई है। 'फरिश्ते' की सफलता में इसके गानों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिनमें 'भाई-बहन का प्यार', 'तेरे बिना जग लगता है सूना', 'सात कुंवरों में एक कुंवारी', 'झंडा ऊंचा रहे हमारा' और 'राजा का बज गया बाजा' जैसे हिट गाने शामिल हैं।

फिल्म में संगीतकार बप्पी लहरी का संगीत आज भी लोगों के बीच लोकप्रिय है। गानों को मोहम्मद अजीज, लता मंगेशकर, अमित कुमार, अनुराधा पौडवाल, शब्बीर कुमार और आशा भोसले जैसे प्रसिद्ध गायकों ने अपनी आवाज दी थी।

'फरिश्ते' की कहानी वीरू (धर्मेंद्र) और धीरू (विनोद खन्ना) नामक दो छोटे अपराधियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी बहन के पति की हत्या का बदला लेने के लिए एक निर्दयी राजा से लड़ते हैं।

3 घंटे और 8 मिनट की इस फिल्म को सत्ती शौरी और मोना शौरी कपूर ने प्रोड्यूस किया था, और यह धर्मेंद्र और विनोद खन्ना की साथ में आखिरी फिल्म थी।