☰
×

क्या आप जानते हैं 'नमक हराम' के पीछे की दिलचस्प कहानी? राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन का अनकहा किस्सा!

फिल्म 'नमक हराम' ने राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन के करियर को एक नई दिशा दी। जानें कैसे इस फिल्म के क्लाइमेक्स में बदलाव ने दोनों सितारों के रिश्तों को प्रभावित किया। ऋषिकेश मुखर्जी की अद्वितीय फिल्म निर्माण शैली और उनके योगदान के बारे में भी जानें। क्या आप जानते हैं कि राजेश खन्ना ने क्लाइमेक्स बदलने की मांग की थी? इस दिलचस्प कहानी को जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
 

राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की अनोखी जोड़ी

नई दिल्ली, 29 सितंबर। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जिनकी कहानी दर्शकों के मन में लंबे समय तक बसी रहती है। ऋषिकेश मुखर्जी की 1973 में रिलीज हुई फिल्म 'नमक हराम' भी ऐसी ही एक फिल्म है। इस फिल्म में राजेश खन्ना और अमिताभ बच्चन की जोड़ी को दूसरी और अंतिम बार बड़े पर्दे पर देखा गया। इससे पहले, दोनों को फिल्म 'आनंद' में दर्शकों ने काफी पसंद किया था। 'नमक हराम' की शूटिंग के दौरान, दोनों सितारों के बीच स्टारडम की बदलती तस्वीर भी स्पष्ट रूप से नजर आने लगी थी।


स्टारडम की जंग

उस समय राजेश खन्ना हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार माने जाते थे, जबकि अमिताभ बच्चन अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे। हालांकि, 'नमक हराम' ने दोनों के करियर की दिशा को बदल दिया। फिल्म की शूटिंग के दौरान, ऋषिकेश मुखर्जी ने क्लाइमेक्स को गुप्त रखा। राजेश खन्ना बार-बार इस बारे में पूछते रहे, लेकिन ऋषि दा ने राज नहीं खोला। अंततः राजेश खन्ना को पता चला कि फिल्म में अमिताभ के किरदार की मौत होती है।


क्लाइमेक्स में बदलाव

इस जानकारी के बाद राजेश खन्ना चिंतित हो गए। उस समय फिल्मों में किसी किरदार की मौत का दर्शकों पर गहरा असर पड़ता था। राजेश खन्ना को लगा कि क्लाइमेक्स अमिताभ के पक्ष में जा सकता है। कहा जाता है कि उन्होंने ऋषिकेश मुखर्जी से क्लाइमेक्स बदलने का अनुरोध किया। राजेश खन्ना का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनकी बात को नजरअंदाज करना मुश्किल था। इस प्रकार, कहानी में बदलाव किया गया और फिल्म के अंत में राजेश खन्ना के किरदार की मौत दिखाई गई।


अमिताभ का रुख

जब अमिताभ बच्चन को इस बदलाव की जानकारी मिली, तो वह इससे खुश नहीं थे। इसके बाद फिल्म में कुछ और बदलाव किए गए, जिससे अमिताभ के किरदार को भी महत्वपूर्ण मोड़ दिया गया। दिलचस्प बात यह है कि इन बदलावों की पूरी जानकारी राजेश खन्ना को नहीं दी गई। जब फिल्म रिलीज हुई, तो दर्शकों ने अमिताभ बच्चन के अभिनय की सराहना की। राजेश खन्ना की मौत के बाद, अमिताभ का किरदार कहानी में एक मजबूत भूमिका निभाता है।


दोनों के रिश्ते में खटास

इस फिल्म के बाद, दोनों के बीच रिश्तों को लेकर कई किस्से सामने आए। कहा जाता है कि राजेश खन्ना इस बात से नाराज थे कि उनके किरदार की मौजूदगी के बावजूद अमिताभ बच्चन ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। इसके बाद, दोनों ने एक साथ काम नहीं किया।


ऋषिकेश मुखर्जी का योगदान

30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे ऋषिकेश मुखर्जी का फिल्म निर्माण का तरीका अद्वितीय था। वह केवल सितारों को ध्यान में रखकर फिल्में नहीं बनाते थे, बल्कि कहानी और किरदारों को प्राथमिकता देते थे। 'आनंद', 'गुड्डी', 'अभिमान', 'चुपके-चुपके' और 'गोलमाल' जैसी फिल्मों के माध्यम से उन्होंने मनोरंजन के साथ-साथ जीवन की सच्चाइयों को भी दर्शाया। ऋषिकेश मुखर्जी ने कई कलाकारों को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 27 अगस्त 2006 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्में आज भी दर्शकों को हंसाती हैं और भावुक करती हैं।