कौन हैं शारदा राजन अयंगर? जानें भारतीय संगीत की जादुई आवाज की कहानी
शारदा का संगीत सफर
मुंबई, 24 अक्टूबर। भारतीय संगीत की दुनिया में अपनी मधुर आवाज से पहचान बनाने वाली पार्श्व गायिका शारदा राजन अयंगर को लोग आज भी सिर्फ 'शारदा' के नाम से जानते हैं। 1960 और 70 के दशक में उन्होंने अपने गानों से लोगों के दिलों में खास जगह बनाई। उनका करियर किसी फिल्मी स्टूडियो से नहीं, बल्कि ईरान की राजधानी तेहरान में भारतीय पार्टियों से शुरू हुआ।
शारदा का प्रारंभिक जीवन
शारदा का जन्म 25 अक्टूबर 1933 को तमिलनाडु के कुंभकोणम में हुआ। बचपन से ही उन्हें संगीत का शौक था, और वह हिंदी गानों को तमिल में लिखकर गुनगुनाया करती थीं। यह शौक धीरे-धीरे उनके लिए एक जुनून बन गया। बाद में उनका परिवार तेहरान चला गया, जहां वह भारतीय समुदाय की पार्टियों में गाने लगीं।
राज कपूर से मुलाकात
तेहरान में एक प्रमुख फिल्म वितरक श्रीचंद आहुजा ने राज कपूर के लिए एक पार्टी आयोजित की, जिसमें शारदा ने गाने गाए। उनकी आवाज से प्रभावित होकर राज कपूर ने उन्हें मुंबई आने का निमंत्रण दिया। मुंबई पहुंचने पर, शारदा को शंकर-जयकिशन के शंकर से मिलवाया गया। इसके अलावा, उन्होंने उस्ताद जगन्नाथ प्रसाद और गायक मुकेश से भी संगीत की शिक्षा ली।
बॉलीवुड में कदम
शारदा ने 1966 में फिल्म 'सूरज' से बॉलीवुड में कदम रखा। इस फिल्म का गाना 'तितली उड़ी, उड़ जो चली' सुपरहिट हुआ, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद उन्होंने 'गुमनाम', 'शतरंज,' और 'अराउंड द वर्ल्ड' जैसी कई फिल्मों में यादगार गाने गाए।
संगीत में योगदान
अपने करियर में, शारदा ने मोहम्मद रफी, किशोर कुमार, मुकेश, आशा भोसले और के.जे. येसुदास जैसे दिग्गजों के साथ गाने गाए। उन्होंने कई प्रमुख अभिनेत्रियों को अपनी आवाज दी। 1971 में, उन्होंने 'सिजलर्स' नाम से पॉप एल्बम रिकॉर्ड किया, जो किसी भारतीय महिला गायिका का पहला पॉप एल्बम था।
अंतिम दिन
शारदा ने 2007 में मिर्जा गालिब की गजलों पर आधारित एल्बम 'अंदाज-ए-बयां' रिलीज किया। 1986 में फिल्म 'कांच की दीवार' में उन्होंने आखिरी बार गाना गाया। उनके निधन के बाद, भारतीय संगीत जगत ने एक महान आवाज खो दी।