कौन हैं मुग्धा गोड्से? जानें उनकी संघर्ष भरी कहानी और सफलता के राज़!
मुग्धा गोड्से का प्रेरणादायक सफर
मुंबई, 25 जुलाई। फैशन और ग्लैमर की दुनिया भले ही आकर्षक दिखती है, लेकिन इसके पीछे का सफर कठिनाइयों से भरा होता है। छोटे शहर से निकलकर देश के प्रमुख फैशन मंच पर पहुंचना और फिर बॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाना आसान नहीं है। अभिनेत्री मुग्धा गोड्से का जीवन इस बात का प्रमाण है।
कहते हैं कि संघर्ष को इतनी चुप्पी से करो कि सफलता खुद शोर मचाए। मुग्धा गोड्से की कहानी इस कहावत का बेहतरीन उदाहरण है। आज वह किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं, लेकिन उनके करियर की शुरुआत में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
26 जुलाई 1986 को पुणे में जन्मी मुग्धा ने अपने शुरुआती दिनों में जीविका के लिए कई छोटे-मोटे काम किए। कहा जाता है कि उन्होंने पेट्रोल पंप पर भी काम किया। एक समय ऐसा था जब वह दिन में केवल 100 रुपए कमाती थीं, लेकिन अपनी मेहनत और समर्पण के बल पर आज वह करोड़ों की संपत्ति की मालिक हैं।
अभिनेत्री ने कई स्थानीय ब्यूटी कॉन्टेस्ट में भी भाग लिया। मुग्धा की किस्मत तब बदली जब उन्होंने 'ग्लैडरेग्स मेगा मॉडल हंट' में भाग लिया और सफलता पाई। उसी वर्ष उन्होंने बेस्ट मॉडल और मिस इंडिया में बेस्ट नेशनल कॉस्ट्यूम का खिताब जीता और 2004 में फेमिना मिस इंडिया कॉन्टेस्ट में सेमी-फाइनलिस्ट रहीं।
इसके बाद मुग्धा ने मधुर भंडारकर की फिल्म 'फैशन' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा, जिसमें प्रियंका चोपड़ा और कंगना रनौत भी थीं। उनकी पहली फिल्म को काफी सराहना मिली, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू आर्टिस्ट के लिए नामांकित किया गया और अप्सरा अवॉर्ड भी मिला।
इसके बाद 2009 में उन्होंने रोहित शेट्टी की कॉमेडी फिल्म 'ऑल द बेस्ट: फन बिगिंस' और मधुर भंडारकर की ड्रामा फिल्म 'जेल' में भी काम किया।
अपने करियर में मुग्धा ने हिंदी के अलावा अन्य भाषाओं की फिल्मों में भी काम किया। उनकी प्रमुख फिल्मों में 'हेल्प' (2010), 'गली गली चोर है' (2012), 'हीरोइन' (2012), 'साहेब, बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स' (2013) और 'सत्याग्रह' (2013) शामिल हैं। उन्होंने मराठी रियलिटी शो 'मराठी पाडते पुढे' में जज की भूमिका भी निभाई। इसके साथ ही, उनका झुकाव आध्यात्म और कृष्ण भक्ति की ओर भी बढ़ा है, जिसे वह अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं।