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कौन हैं दया किशन सप्रू? जानें भारतीय सिनेमा के इस दिग्गज अभिनेता की अनकही कहानी

दया किशन सप्रू, जिन्हें 'साहिब बीबी और गुलाम' में मझले सरकार के रूप में जाना जाता है, भारतीय सिनेमा के एक अद्वितीय अभिनेता हैं। उनका जन्म 1916 में जम्मू-कश्मीर में हुआ था और उन्होंने अपने करियर में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। इस लेख में हम उनकी जीवन यात्रा, अभिनय की शुरुआत, और उनके योगदान के बारे में जानेंगे। सप्रू की कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय भी है।
 

दया किशन सप्रू: एक अद्वितीय अभिनेता की यात्रा




नई दिल्ली, 15 मार्च। समय के साथ, सिनेमा की दुनिया में कुछ सितारे ऐसे होते हैं जिनकी चमक कभी फीकी नहीं पड़ती। इनमें से एक हैं 'साहिब बीबी और गुलाम' के मझले सरकार, जिन्हें दया किशन सप्रू के नाम से जाना जाता है। उनके प्रशंसक उन्हें प्यार से 'सप्रू' कहते हैं। उन्होंने अपने अद्वितीय अभिनय और प्रभावशाली उपस्थिति से कई पीढ़ियों के दिलों में एक खास स्थान बनाया।


उनकी सबसे प्रसिद्ध भूमिका 1962 की फिल्म 'साहिब बीबी और गुलाम' में मझले सरकार के रूप में थी, जहां कम संवादों के बावजूद उनकी प्रभावशाली उपस्थिति ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।


दया किशन सप्रू का जन्म 16 मार्च 1916 को जम्मू-कश्मीर में एक कश्मीरी पंडित परिवार में हुआ। उनका पूरा नाम दया किशन सप्रू था। उनके परिवार में चार भाई और दो बहनें थीं। उनके पिता डोगरा राज्य के खजांची थे और महाराजा हरि सिंह के समय में कार्यरत थे। परिवार के पास जम्मू और लाहौर में दो घर थे। उन्होंने उर्दू और हिंदी में शिक्षा प्राप्त की, लेकिन अंग्रेजी में रुचि के कारण खुद से अंग्रेजी सीखी। संगीत के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था।


अभिनय की दुनिया में कदम रखने की कहानी भी दिलचस्प है। सप्रू न केवल आकर्षक दिखते थे, बल्कि उनकी आवाज भी अद्भुत थी। एक दिन, कॉलेज के दोस्तों ने उनकी खूबसूरती और आवाज को देखकर उन्हें फिल्मों में जाने की सलाह दी। उन्होंने बिना माता-पिता को बताए पुणे जाने का निर्णय लिया। वहां उन्होंने प्रभात स्टूडियो के मालिक वी. शांताराम और अन्य से मुलाकात की। 1944 में उन्हें मराठी फिल्म 'रामशास्त्री' में एक छोटा सा रोल मिला, और इसके बाद हिंदी में 'चंद' से डेब्यू किया।


धीरे-धीरे, सप्रू ने अपने अभिनय और आवाज के दम पर सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। वह अक्सर सख्त जज, पुलिस कमिश्नर, जमींदार या खलनायक के किरदार निभाते थे। 'साहिब बीबी और गुलाम' में मझले सरकार की भूमिका उनके करियर की सबसे चर्चित रही।


कम ही लोग जानते हैं कि 'पाकीजा' में उन्हें अशोक कुमार का किरदार निभाने का मौका मिला था, लेकिन बाद में वह विलेन के किरदार के लिए चुने गए। उनकी अन्य प्रमुख फिल्मों में 'ज्वेल थीफ', 'देवार', 'हीर रांझा', और 'मुझे जीने दो' शामिल हैं।


सप्रू की दोस्ती देव आनंद, गुरुदत्त और रहमान से थी। वह सुबह 5 बजे उठकर रियाज करते थे ताकि उनकी आवाज मजबूत बनी रहे। बाद में, उन्होंने होम्योपैथिक डॉक्टर बनने का निर्णय लिया। 1948 में, उन्होंने अभिनेत्री हेमवती से विवाह किया। उनके तीन बच्चे हैं: बेटी प्रीति सप्रू, बेटा तेज सप्रू, और बेटी रीमा राकेश नाथ।


20 अक्टूबर 1979 को मुंबई में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। इससे पहले, उन्हें कैंसर हुआ था, लेकिन वह ठीक हो गए थे। उनकी याद में, 2024 में अंधेरी (मुंबई) में फन रिपब्लिक रोड का नाम 'श्री दया किशन सप्रू मार्ग' रखा जाएगा।