कौन हैं कैलाश खेर? जानें वाराणसी में बाबा कालभैरव के दरबार में उनकी भक्ति का किस्सा!
कैलाश खेर की बाबा कालभैरव मंदिर यात्रा
वाराणसी, 16 मार्च। देश के प्रसिद्ध पार्श्व गायक और संगीतकार कैलाश खेर ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित बाबा कालभैरव मंदिर का दौरा किया। यहां उन्होंने काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव के समक्ष माथा टेककर आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर कैलाश खेर ने अपने प्रसिद्ध शिव भजन 'बम बम लहरी' का गायन किया, जो उन्होंने बाबा को समर्पित किया। इस दौरान, वह माथे पर चंदन, गले में फूलों की माला और हाथ में फूलों की टोकरी लिए हुए नजर आए। मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह देखने लायक था, सभी बाबा की भक्ति में लीन थे।
बाबा कालभैरव मंदिर, भगवान शिव के उग्र रूप कालभैरव को समर्पित एक प्राचीन स्थल है, जिसे 'काशी का कोतवाल' माना जाता है। मान्यता है कि भक्तों को बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले कालभैरव की अनुमति लेनी होती है, अन्यथा उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है।
इस मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है, और इसे 17वीं सदी का माना जाता है, जो देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां बाबा के दर्शन के लिए आते हैं।
कैलाश खेर, जो अपनी अनोखी और शक्तिशाली आवाज के लिए जाने जाते हैं, सूफी-लोक संगीत शैली में माहिर हैं। उन्होंने बॉलीवुड में 300 से अधिक गानों में अपनी आवाज दी है।
उनके कुछ प्रमुख हिंदी गानों में 'अल्लाह के बंदे', 'संइया', 'तेरी दीवानी', 'या रब्बा', 'पिया घर आवेंगे', 'चांद सिफारिश', 'यूं ही चला चल', और 'तौबा तौबा' शामिल हैं। 2017 में उन्हें उनकी उत्कृष्ट गायकी के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
कैलाश खेर हिंदी फिल्मों के गानों के साथ-साथ कई शिव भजन और स्तुति के लिए भी प्रसिद्ध हैं। इनमें 'शिव शंभो', 'बम बम लहरी', 'आदियोगी', 'शिवोहम', 'अनादि अनंता', 'जय जय केदारा', 'कर्पूर गौरम', 'महामृत्युंजय मंत्र', और 'कौन है वो कहां से आया' जैसे भजन शामिल हैं।