कौन हैं एनटीआर? जानें भारतीय सिनेमा के भगवान कृष्ण के 17 बार अवतार लेने वाले अभिनेता की कहानी!
एनटीआर: भारतीय सिनेमा के पौराणिक नायक
मुंबई, 27 मई। भारतीय फिल्म उद्योग में नंदमुरी तारक रामा राव, जिन्हें एनटीआर के नाम से जाना जाता है, ने अपनी अद्वितीय अभिनय क्षमता और गहरी आवाज के साथ दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया। जब वह भगवान कृष्ण या भगवान राम का किरदार निभाते थे, तो दर्शक उन्हें सचमुच भगवान का रूप मानने लगते थे। शूटिंग के दौरान, कई लोग सेट पर आकर उनके चरणों को छूते थे, जिससे वह अपने समय के सबसे बड़े धार्मिक प्रतीक बन गए।
एनटीआर का जन्म 28 मई 1923 को आंध्र प्रदेश के निम्माकारू गांव में हुआ। उनका परिवार कृषि से जुड़ा था और उन्होंने अपने बचपन में कई कठिनाइयों का सामना किया। पढ़ाई के साथ-साथ, उन्होंने परिवार की आर्थिक स्थिति में मदद करने के लिए दूध बेचने का काम भी किया। पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्हें सरकारी नौकरी मिली, लेकिन उनका सपना अभिनय का था। इसलिए, उन्होंने जल्दी ही नौकरी छोड़कर फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा।
उन्होंने 1949 में 'मना देशम' फिल्म से अपने करियर की शुरुआत की। शुरुआत में, उन्होंने विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए, लेकिन पौराणिक फिल्मों ने उन्हें एक नई पहचान दी। एनटीआर ने भगवान कृष्ण का किरदार 17 बार निभाया, साथ ही भगवान राम, भगवान शिव और भगवान विष्णु के रोल भी किए।
जब वह पर्दे पर भगवान कृष्ण के रूप में आते थे, तो दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते थे। उनकी मुस्कान, बोलने का तरीका और चेहरे की चमक ने लोगों को आकर्षित किया। छोटे शहरों और गांवों में लोग उनकी तस्वीरों की पूजा करने लगे और कई लोग फिल्म के पोस्टरों पर फूल चढ़ाते थे। शूटिंग के दौरान भी लोग उनके चरणों को छूकर आशीर्वाद लेने की कोशिश करते थे।
एनटीआर ने सामाजिक और एक्शन फिल्मों में भी बेहतरीन काम किया। उनकी फिल्म 'पाताल भैरवी' भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। यह पहली दक्षिण भारतीय फिल्म थी, जिसे इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया में प्रदर्शित किया गया। इसके अलावा, 'मायाबाजार', 'मल्लीश्वरी' और 'नर्तनशाला' जैसी फिल्मों ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
वह केवल एक अभिनेता नहीं थे, बल्कि एक निर्माता, निर्देशक और लेखक भी थे। अपने किरदारों के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। फिल्म 'नर्तनशाला' के लिए, उन्होंने 40 साल की उम्र में कुचिपुड़ी नृत्य सीखा। उनके काम के प्रति समर्पण की हर कोई सराहना करता था।
फिल्मों में अपार सफलता के बाद, एनटीआर ने राजनीति में कदम रखा। 1982 में, उन्होंने तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की, जो जल्दी ही सत्ता में आई और वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने गरीबों और आम लोगों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं।
उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिसमें 1968 में पद्मश्री और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार शामिल हैं। 2013 में, भारतीय सिनेमा के 100 साल पूरे होने पर, उन्हें 'ग्रेटेस्ट इंडियन एक्टर ऑफ ऑल टाइम' का खिताब दिया गया।
18 जनवरी 1996 को उनका निधन हार्ट अटैक के कारण हुआ। उनके अंतिम दर्शन के लिए लाखों लोग उमड़ पड़े।