कौन थे अंजान? जानें हिंदी सिनेमा के मशहूर गीतकार की प्रेरणादायक कहानी
अंजान: हिंदी सिनेमा के अनमोल गीतकार
मुंबई, 27 अक्टूबर। हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में कई ऐसे गीतकार हुए हैं, जिनके गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं। इनमें से एक प्रमुख नाम है अंजान, जिन्होंने 'खइके पान बनारस वाला', 'ओ साथी रे' और 'रोते हुए आते हैं सब' जैसे गाने लिखे हैं, जो आज भी बेहद लोकप्रिय हैं।
हालांकि, अंजान के लिए फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना आसान नहीं था। एक समय ऐसा भी आया जब उन्हें अपना गुजारा करने के लिए बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना पड़ा। लेकिन, अपनी लेखनी के बल पर उन्होंने हिंदी सिनेमा में एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया, और अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों के गाने उनकी पहचान बन गए।
अंजान का असली नाम लालजी पांडेय था, और उनका जन्म 28 अक्टूबर 1930 को उत्तर प्रदेश के बनारस में हुआ। उन्हें बचपन से ही कविता और शायरी का शौक था। बनारस में रहते हुए उनकी कविताएं स्थानीय पत्रिकाओं में छपने लगीं, और उन्होंने कवि सम्मेलनों में भी भाग लिया। यही शौक उन्हें फिल्मी गीतकार बनने की ओर ले गया।
अपने सपनों को पूरा करने के लिए अंजान ने मुंबई का रुख किया, लेकिन वहां पहुंचने के बाद उन्हें तुरंत काम नहीं मिला। फिल्मों में पहचान बनाने के लिए उन्हें कई सालों तक संघर्ष करना पड़ा। इस दौरान, वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते रहे और इसी से अपने खर्चे चलाते रहे।
1953 में उन्हें प्रेमनाथ की फिल्म 'प्रिजनर ऑफ गोलकोंडा' में गीत लिखने का अवसर मिला, जिसे उनके करियर की शुरुआत माना जाता है। इस फिल्म के लिए उन्होंने 'लहर ये डोले कोयल बोले' और 'शहीदों अमर है तुम्हारी कहानी' जैसे गाने लिखे।
उनकी करियर में 1963 में आई फिल्म 'गोदान' एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई। पंडित रविशंकर के संगीत से सजी इस फिल्म के गाने लोगों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे। अंजान ने 'हियरा जरत जरत', 'पिपरा के पतवा' और 'जनम लियो ललना' जैसे गाने लिखे।
इसके बाद, अंजान के लिए नए अवसर खुलने लगे। उन्होंने कई प्रसिद्ध संगीतकारों जैसे कल्याणजी-आनंदजी, लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल, आर.डी. बर्मन और बप्पी लाहिड़ी के साथ काम किया। फिल्म 'बंधन' का 'बिना बदरा के बिजुरिया' भी उनके चर्चित गानों में से एक है।
अमिताभ बच्चन की फिल्मों के लिए लिखे गए गाने अंजान को विशेष पहचान दिलाने में सफल रहे। फिल्म 'डॉन' का 'खइके पान बनारस वाला' उनके सबसे प्रसिद्ध गानों में से एक है। इसके अलावा, 'मुकद्दर का सिकंदर' का 'ओ साथी रे' और 'रोते हुए आते हैं सब' भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।
अंजान ने अपने करियर में 300 से अधिक फिल्मों के लिए 1,500 से ज्यादा गाने लिखे। उन्होंने भोजपुरी सिनेमा में भी काम किया, और भोजपुरी फिल्म 'बलम परदेसिया' के गाने भी काफी पसंद किए गए। अंजान ने अपने जीवन के अंतिम दिनों तक लेखन से संबंध बनाए रखा। उनकी कविताओं की किताब 'गंगा तट का बंजारा' 1997 में प्रकाशित हुई थी, जिसका विमोचन अमिताभ बच्चन ने किया था। 3 सितंबर 1997 को मुंबई में उनका निधन हो गया, जब उनकी उम्र 66 वर्ष थी।