कैसे योग क्लास ने अनुष्का शेट्टी की जिंदगी बदल दी? जानें उनकी अनकही कहानी!
अनुष्का शेट्टी की अनोखी यात्रा
मुंबई, 6 नवंबर। फिल्म इंडस्ट्री की चकाचौंध में हर कोई अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्षरत है। लेकिन कुछ सितारे ऐसे भी हैं, जिन्होंने कभी सिनेमा में आने का सपना नहीं देखा था। दक्षिण भारतीय सिनेमा की प्रसिद्ध अभिनेत्री अनुष्का शेट्टी की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। उन्होंने कभी फिल्मों में काम करने की इच्छा नहीं जताई, लेकिन एक संयोग ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
अनुष्का शेट्टी का जन्म 7 नवंबर, 1981 को कर्नाटक के मैंगलुरु में हुआ। उन्होंने बेंगलुरु के माउंट कार्मेल कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। अभिनेत्री का सपना योग विशेषज्ञ बनने का था, इसलिए उन्होंने योग गुरु भरत ठाकुर से योग सीखा और खुद एक योग प्रशिक्षक बन गईं। एक दिन योग क्लास में साउथ फिल्म निर्देशक मेहर रमेश की नजर उन पर पड़ी, जिन्होंने उन्हें हीरोइन बनने का प्रस्ताव दिया।
हालांकि, अनुष्का ने बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड और अभिनय के अनुभव के कारण इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। लेकिन निर्देशक के लगातार समझाने पर उन्होंने अभिनय की दुनिया में कदम रखा। उनकी पहली फिल्म 'सुपर' थी, जो 2005 में रिलीज हुई और इसे पुरी जगन्नाथ ने निर्देशित किया। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता नागार्जुन के साथ काम किया।
दिलचस्प बात यह है कि अनुष्का का असली नाम स्वीटी शेट्टी था। फिल्म की शूटिंग के दौरान, पुरी जगन्नाथ और प्रोड्यूसर नागार्जुन ने महसूस किया कि स्वीटी नाम दर्शकों को आकर्षित नहीं करेगा, इसलिए उन्होंने अभिनेत्री का नाम बदलने का निर्णय लिया और अनुष्का नाम को अंतिम रूप दिया।
अनुष्का ने 2006 में एस. एस. राजामौली की फिल्म 'विक्रमार्कुडु' में काम किया, जिसने उन्हें तेलुगू सिनेमा में पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने 'डॉन', 'किंग', 'शौर्यम' और 'बिल्ला' जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया।
उनकी किस्मत 2015 में आई 'बाहुबली: द बिगनिंग' और 2017 में 'बाहुबली: द कंक्लूजन' से बदल गई। इस फिल्म में देवसेना के किरदार के लिए एस. एस. राजामौली ने खुद उन्हें कॉल किया। अनुष्का ने इस प्रस्ताव को ठुकराया नहीं और यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।