कैसे एक अपमान ने वाजिद खान को बनाया बॉलीवुड का मशहूर संगीतकार?
वाजिद खान की प्रेरणादायक यात्रा
मुंबई, 31 मई। बॉलीवुड में कई ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने अपनी मेहनत और संघर्ष से एक अलग पहचान बनाई है। इनमें से एक हैं प्रसिद्ध संगीतकार वाजिद खान। वाजिद ने अपने भाई साजिद के साथ मिलकर हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को कई हिट गाने दिए। लेकिन, संगीत की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उनकी जिंदगी में एक ऐसा क्षण आया जिसने उनके दृष्टिकोण को बदल दिया और उसी घटना ने उन्हें एक सफल संगीतकार बनने की प्रेरणा दी। वाजिद खान का निधन 1 जून 2020 को हुआ, लेकिन उनके गाने आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं।
वाजिद का जन्म 7 अक्टूबर 1977 को एक संगीत प्रेमी परिवार में हुआ। उनके पिता, शराफत अली खान, एक प्रसिद्ध तबला वादक थे, और परिवार के अन्य सदस्य भी संगीत से जुड़े हुए थे। इस माहौल ने वाजिद को बचपन से ही संगीत की ओर आकर्षित किया। उन्हें गिटार बजाना बहुत पसंद था और उन्होंने जल्दी ही संगीत की बारीकियों को सीखना शुरू कर दिया।
संगीत के क्षेत्र में अपने शुरुआती दिनों में वाजिद और साजिद ने अन्य संगीतकारों के साथ काम किया। इसी दौरान एक घटना ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। एक रिकॉर्डिंग स्टूडियो में, जब वाजिद गिटार बजा रहे थे, एक गलत सुर सुनाई दिया और इसका आरोप उन पर लगा दिया गया। जबकि गलती उनकी नहीं थी, फिर भी उन्हें सबके सामने डांट सुननी पड़ी। उस समय उनके पिता भी वहां मौजूद थे और अपने बेटे को इस तरह अपमानित होते देख उनकी आंखों में आंसू आ गए। इस घटना ने वाजिद को गहराई से प्रभावित किया। उन्होंने और साजिद ने उसी दिन तय किया कि वे दूसरों के लिए नहीं, बल्कि अपने लिए संगीत बनाएंगे।
इसके बाद, दोनों भाइयों ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत की। उनकी किस्मत तब बदली जब उन्हें सलमान खान की फिल्म 'प्यार किया तो डरना क्या' में संगीत देने का अवसर मिला। फिल्म का गाना 'तेरी जवानी बड़ी मस्त मस्त है' हिट हो गया और साजिद-वाजिद की जोड़ी बॉलीवुड में प्रसिद्ध हो गई। इसके बाद, उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सलमान खान के साथ उनकी जोड़ी विशेष रूप से सफल रही। 'तुमको ना भूल पाएंगे', 'गर्व', 'पार्टनर', 'वॉन्टेड' और 'दबंग' जैसी फिल्मों में उनके संगीत को बहुत सराहा गया। वाजिद केवल एक संगीतकार नहीं थे, बल्कि एक उत्कृष्ट गायक भी थे। उन्होंने 'मेरा ही जलवा', 'हमका पीनी है' जैसे कई हिट गानों में अपनी आवाज दी।
साजिद-वाजिद को 2011 में फिल्म 'दबंग' के संगीत के लिए प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अलावा, उन्हें कई अन्य पुरस्कार भी मिले।
हालांकि, सफलता के इस सफर में वाजिद को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ा। वह लंबे समय तक किडनी की बीमारी से जूझते रहे, लेकिन इलाज के बावजूद उन्होंने संगीत से अपना रिश्ता नहीं तोड़ा। अंतिम समय तक वह अपने काम के प्रति समर्पित रहे।