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कैलाश खेर: संघर्ष से सफलता की ओर, जानें उनकी प्रेरणादायक कहानी

कैलाश खेर की कहानी संघर्ष और सफलता की अद्भुत मिसाल है। एक समय जब वह बिजनेस में नुकसान के बाद डिप्रेशन में चले गए थे, उन्होंने संगीत की ओर लौटने का निर्णय लिया। ऋषिकेश में बिताए समय ने उन्हें नई ऊर्जा दी। जानें कैसे उन्होंने बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाई और कई हिट गाने दिए। उनकी यात्रा प्रेरणा देती है कि कैसे कठिनाइयों से उबरकर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
 

कैलाश खेर का संघर्ष और संगीत की ओर वापसी


मुंबई, 6 जुलाई। भारतीय संगीत के क्षेत्र में अपनी अद्भुत सूफियाना आवाज से पहचान बनाने वाले कैलाश खेर की यात्रा उतार-चढ़ाव से भरी रही है। उनकी सफलता की कहानी में संघर्ष की गहराई है। एक समय ऐसा भी आया जब बिजनेस में भारी नुकसान के कारण वह डिप्रेशन में चले गए थे और आत्महत्या का विचार उनके मन में आया।


कैलाश का जन्म 7 जुलाई 1973 को उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक कश्मीरी हिंदू परिवार में हुआ। संगीत के प्रति उनका झुकाव बचपन से ही था, क्योंकि उनके पिता मेहर सिंह खेर एक लोक गायक थे। उन्होंने बहुत छोटी उम्र में संगीत की शिक्षा लेना शुरू किया। अपने करियर में कुछ बड़ा करने की चाह में, उन्होंने अपने दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट का व्यवसाय शुरू किया, लेकिन यह असफल रहा और उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।


इस कठिनाई ने उन्हें मानसिक रूप से प्रभावित किया। डिप्रेशन में जाने के बाद, उन्होंने जीवन समाप्त करने का विचार किया, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभाला और संगीत की ओर लौटने का निर्णय लिया।


कैलाश ने ऋषिकेश जाकर साधु-संतों के बीच समय बिताया, जहां भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक वातावरण ने उन्हें मानसिक शांति दी। इस अनुभव ने उन्हें नई ऊर्जा दी और उन्होंने संगीत को अपने जीवन का केंद्र बनाने का निर्णय लिया।


2001 में, उन्होंने मुंबई में अपने संगीत करियर की नई शुरुआत की। शुरुआत में छोटे काम और विज्ञापन जिंगल्स गाने का मौका मिला। उनका संघर्ष धीरे-धीरे रंग लाने लगा और उन्हें पहचान मिलने लगी। उन्हें फिल्म 'अंदाज' के गाने 'रब्बा इश्क ना होवे' से बड़ा ब्रेक मिला, जिसने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया। इसके बाद उनका हिट गाना 'अल्लाह के बंदे हंस दे' आया, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।


कैलाश खेर ने कई हिट गाने दिए, जैसे 'तेरी दीवानी', 'सैयां', 'बम लहरी', और 'जय जयकारा'। उन्होंने 'कैलासा' नामक एक बैंड भी बनाया, जिसके माध्यम से उन्होंने लोक और सूफी संगीत को आधुनिक रूप में प्रस्तुत किया। उनके बैंड के कई एल्बम सफल रहे और उन्होंने देश-विदेश में हजारों स्टेज शो किए।


भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया है। इसके अलावा, उन्होंने फिल्मफेयर अवार्ड और कई अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार भी जीते हैं। कैलाश ने हिंदी के साथ-साथ 20 से अधिक भाषाओं में गाने गाए हैं और 700 से ज्यादा गानों में अपनी आवाज दी है।