केके: एक जादुई आवाज की यादें, जो दिलों में बसी हैं
केके की अनमोल धुनें और उनकी यात्रा
नई दिल्ली, 30 मई। 'हम रहें या न रहें कल, कल याद आएंगे ये पल...' यह केवल केके के गाने की एक पंक्ति नहीं है, बल्कि यह करोड़ों दिलों की भावनाओं का प्रतीक है। जब भी यह गाना सुनाई देता है, यह लोगों के दिलों को छू जाता है। उनकी आवाज में न तो कोई दिखावा था और न ही शोर, बल्कि एक ऐसा जादू था जो सीधे दिल में उतर जाता था। जब 31 मई 2022 को केके ने इस दुनिया को अलविदा कहा, तब उनके फैंस को उनकी ही गाई ये पंक्तियाँ याद आईं।
केके का असली नाम कृष्णकुमार कुन्नथ था, जिनका जन्म 23 अगस्त 1968 को दिल्ली में एक मलयाली परिवार में हुआ। उनके पिता सीएस नायर और मां कनकवल्ली उनकी पहली प्रेरणा बने। दिल्ली में बड़े होते हुए, केके का सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन किस्मत ने उन्हें संगीत की ओर मोड़ दिया।
माउंट सेंट मैरी स्कूल में पढ़ाई के दौरान उनकी गायकी की प्रतिभा उभरने लगी। दूसरी कक्षा में उन्होंने पहली बार मंच पर प्रस्तुति दी। किशोर कुमार और आरडी बर्मन उनके आदर्श थे, और शायद यही कारण था कि उनकी आवाज में पुरानी मिठास और नई ताजगी दोनों का समावेश था।
दिल्ली विश्वविद्यालय से कॉमर्स में स्नातक करने के बाद, केके ने कुछ समय होटल इंडस्ट्री में मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव के रूप में काम किया। लेकिन उनका असली प्यार संगीत में था। 1994 में, वे मुंबई आए और संघर्ष की शुरुआत की।
मुंबई में, उन्हें पहले विज्ञापनों में गाने का मौका मिला। उन्होंने 3,500 से अधिक जिंगल्स रिकॉर्ड किए, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि थी। कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों में उनकी आवाज सुनाई दी। इस दौरान, संगीतकार लेस्ली लुईस ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें मार्गदर्शन दिया।
फिल्मी दुनिया में केके को पहला बड़ा मौका संगीतकार और निर्देशक विशाल भारद्वाज ने दिया। फिल्म 'माचिस' के गीत 'छोड़ आए हम' से उनकी शुरुआत हुई, लेकिन असली पहचान 1999 में आई फिल्म 'हम दिल दे चुके सनम' के गीत 'तड़प तड़प के' से मिली। इस गाने में प्रेम और बिछड़ने की भावना को केके ने अपनी आवाज से अमर बना दिया।
1999 में सोनी म्यूजिक ने केके का पहला सोलो एल्बम 'पल' जारी किया। इस एल्बम के गाने 'पल' और 'यारों' आज भी हर फेयरवेल और दोस्तों की महफिल का हिस्सा हैं।
केके उन चुनिंदा गायकों में से थे जिनकी आवाज हर तरह के गीतों में समाहित होती थी। रोमांस, दर्द, दोस्ती या जीवन का उत्साह, हर भावना को उन्होंने बखूबी व्यक्त किया। 'आंखों में तेरी', 'खुदा जाने', 'जरा सा', 'अलविदा', 'तू ही मेरी शब है', 'बीते लम्हें', 'दिल इबादत', 'दस बहाने' जैसे कई गाने आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं।
उन्होंने हिंदी के अलावा तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी और बंगाली भाषाओं में भी गाने गाए। उनके करियर में 700 से अधिक गाने शामिल हैं।
31 मई 2022 को कोलकाता के नजरुल मंच में एक लाइव कॉन्सर्ट के दौरान केके ने प्रस्तुति दी। शो खत्म होने के कुछ समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई और उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महज 53 साल की उम्र में, संगीत की यह जादुई आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई और फैंस की जुबां पर बस एक पंक्ति रह गई 'छोड़ आए हम, वो गलियां...।'