कपूर परिवार का अनमोल सितारा: कमल कपूर की कहानी जो खलनायक बनकर चमके
कमल कपूर: कपूर खानदान का अनोखा सितारा
मुंबई, 1 अगस्त। जब भी बॉलीवुड के प्रभावशाली परिवारों की चर्चा होती है, कपूर परिवार का नाम सबसे पहले आता है। इस परिवार ने हिंदी सिनेमा को कई महान सितारे दिए हैं, जैसे पृथ्वीराज कपूर, शशि कपूर, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर, जिन्होंने फिल्म उद्योग में अपनी छाप छोड़ी है।
हालांकि, कपूर परिवार में एक ऐसा अभिनेता भी है, जिसने नकारात्मक भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई। उनका नाम कमल कपूर है, जो एक प्रसिद्ध अभिनेता और निर्माता थे।
कमल कपूर, मशहूर अभिनेता पृथ्वीराज कपूर के चचेरे भाई थे। उनका जन्म 22 फरवरी 1920 को पेशावर (अब पाकिस्तान) में हुआ। उन्होंने अपनी शिक्षा लाहौर के डीएवी कॉलेज से प्राप्त की। पढ़ाई के बाद, कमल कपूर ने 1946 में फिल्म 'दूर चले' से अपने करियर की शुरुआत की। लेकिन उन्हें हीरो के रूप में ज्यादा सफलता नहीं मिली।
इसके बाद, उन्होंने नकारात्मक भूमिकाओं की ओर रुख किया, जो दर्शकों को बेहद पसंद आईं।
अपने पांच दशकों के करियर में, कमल कपूर ने लगभग 600 फिल्मों में अभिनय किया। उन्होंने हिंदी, पंजाबी और गुजराती सिनेमा में भी काम किया। उन्हें मुख्य रूप से अपने प्रभावशाली खलनायक किरदारों के लिए जाना जाता था।
उनकी कुछ प्रसिद्ध फिल्मों में 'डॉन', 'नारंग', 'मर्द', 'आग', 'दीवाना', 'कालीचरण', 'खेल खेल में' और 'नमक हलाल' शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने 'पाकीजा', 'दीवार', 'सीती और गीता', और 'जब तक फूल खिले' जैसी कई अन्य चर्चित फिल्मों में भी काम किया।
कमल कपूर ने 1945 में सुमन देवी कपूर से विवाह किया और उनके पांच बच्चे हुए, जिनमें तीन बेटे और दो बेटियां शामिल हैं। उनकी छोटी बेटी की शादी प्रसिद्ध फिल्म निर्माता रमेश बहल से हुई, और वह निर्देशक-निर्माता गोल्डी बहल की मां हैं।
कमल कपूर का निधन 2 अगस्त 2010 को 90 वर्ष की आयु में मुंबई में हुआ, लेकिन उनकी अदाकारी आज भी लोगों के दिलों में जीवित है। जब भी खलनायक की बात होती है, उनका नाम याद किया जाता है।