कंगना रनौत ने 'इमरजेंसी' फिल्म के जरिए आपातकाल की कहानी को किया जीवंत!
आपातकाल की याद में कंगना का विशेष वीडियो
मुंबई, 25 जून। भारतीय इतिहास में 25 जून का दिन 'संविधान हत्या दिवस' के रूप में जाना जाता है। इस दिन 1975 में देश में आपातकाल लागू किया गया था, जिसे लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ एक गंभीर कदम माना जाता है। इस अवसर पर, अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने अपनी फिल्म 'इमरजेंसी' के निर्माण से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया।
कंगना ने इंस्टाग्राम पर इस वीडियो के माध्यम से फिल्म की तैयारी, कलाकारों के अनुभव और कुछ महत्वपूर्ण दृश्यों को दर्शाया है, जो आपातकाल के समय की घटनाओं को उजागर करते हैं। वीडियो में यह दिखाया गया है कि उस समय की घटनाओं को पर्दे पर लाने के लिए कितनी मेहनत की गई। कंगना ने इस पोस्ट के साथ एक विस्तृत कैप्शन भी लिखा।
उन्होंने अपने कैप्शन में लिखा, ''आज हम उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने भारत के इतिहास के सबसे कठिन और अंधकारमय दौर में, यानी आपातकाल के समय, लोकतांत्रिक मूल्यों की मजबूती से रक्षा की। आपातकाल हमारे संविधान पर एक सीधा हमला था। इस दौरान नागरिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी गई, राजनीतिक नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियां हुईं और लोकतंत्र की नींव मानी जाने वाली संस्थाओं पर भी गंभीर असर पड़ा।''
कंगना ने आगे लिखा, ''मैंने इस विषय पर एक फिल्म का निर्देशन, अभिनय और निर्माण किया है। एक फिल्मकार के रूप में यह मेरे लिए एक बेहद असाधारण अनुभव रहा। आप सभी से अनुरोध है कि फिल्म 'इमरजेंसी' को नेटफ्लिक्स पर देखें।''
इस वीडियो में फिल्म से जुड़े कलाकारों की भी झलक दिखाई गई, जहां कई कलाकारों ने कंगना के निर्देशन की सराहना की। प्रसिद्ध अभिनेता अनुपम खेर ने कहा, ''कंगना के साथ निर्देशक के रूप में काम करना मेरे लिए एक खास अनुभव रहा। वह बहुत ही बारीकी से काम करने वाली निर्देशक हैं।''
सतीश कौशिक ने भी कहा कि कंगना एक ऐसे निर्देशक हैं जो हर छोटे से छोटे चीजों पर ध्यान देती हैं और कलाकारों से बेहतरीन प्रदर्शन निकलवाने में सक्षम हैं। इसके अलावा अभिनेता श्रेयस तलपड़े समेत अन्य कलाकारों ने भी उनके काम की सराहना की।
फिल्म 'इमरजेंसी' में कंगना ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का किरदार निभाया है। यह फिल्म 17 जनवरी 2025 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है और इसके जरिए आपातकाल के दौर की राजनीतिक परिस्थितियों को सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है.