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ओम प्रकाश: जब शादी में मिला पहला फिल्मी ऑफर, जानें उनकी अनकही कहानी!

ओम प्रकाश, हिंदी सिनेमा के एक महान अभिनेता, ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए। उनकी पुण्यतिथि पर, जानें कैसे एक शादी समारोह में उन्हें पहला फिल्मी ऑफर मिला। उनका सफर, जो ऑल इंडिया रेडियो से शुरू हुआ, ने उन्हें 300 से अधिक फिल्मों में काम करने का अवसर दिया। उनके अभिनय की शक्ति और विविधता ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान दिलाया।
 

ओम प्रकाश का अद्वितीय सफर


मुंबई, 20 फरवरी। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ओम प्रकाश ने कई दशकों तक दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान और कभी-कभी आंसू भी लाए। उनके हर किरदार में जान होती थी, और भले ही उन्हें कभी हीरो नहीं कहा गया, लेकिन उनके अभिनय की गहराई ने उन्हें दर्शकों के दिलों में एक खास स्थान दिलाया। आज उनकी पुण्यतिथि पर, हम उनके जीवन के एक दिलचस्प किस्से पर चर्चा करेंगे, जब उन्हें अपना पहला फिल्मी प्रस्ताव एक शादी समारोह में मिला।


ओम प्रकाश का जन्म 19 दिसंबर 1919 को जम्मू में हुआ, और उनका पूरा नाम ओम प्रकाश बख्शी था। बचपन से ही उन्हें मंच और अभिनय का गहरा शौक था, और वे जम्मू के दीवान मंदिर में रामलीला और अन्य नाटकों में भाग लेते थे।


उनका करियर ऑल इंडिया रेडियो से शुरू हुआ। 1937 में, वे लाहौर (अब पाकिस्तान) में ऑल इंडिया रेडियो से जुड़े, जहां उन्हें केवल 25 रुपए महीने का वेतन मिलता था। उनका कार्यक्रम 'फतेहदीन' बहुत लोकप्रिय हुआ, और लोग इसे सुनने के लिए उत्सुक रहते थे। हालांकि, उनका सपना फिल्मों में काम करने का था।


ओम प्रकाश की फिल्म इंडस्ट्री में एंट्री भी एक फिल्मी कहानी से कम नहीं थी। एक बार, वे अपने दोस्त की शादी में गए थे, जहां उन्होंने लोगों का मनोरंजन किया। इसी दौरान, प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक दलसुख पंचोली ने उन्हें देखा और उनकी प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें लाहौर बुलाया। वहां, उन्हें 1950 में फिल्म 'दासी' में काम करने का अवसर मिला।


इस फिल्म के लिए उन्हें केवल 80 रुपए मिले, लेकिन यह उनके करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ।


फिल्म 'दासी' के बाद, ओम प्रकाश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनके अभिनय की शक्ति और विविध किरदारों ने उन्हें हिंदी सिनेमा का एक विश्वसनीय अभिनेता बना दिया। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया, जिनमें 'पड़ोसन', 'चुपके-चुपके', 'दस लाख', 'गोपी', 'नमक हलाल', 'शराबी', और 'जंजीर' जैसी चर्चित फिल्में शामिल हैं।


उन्होंने अमिताभ बच्चन के साथ भी कई यादगार भूमिकाएं निभाईं, विशेषकर 'नमक हलाल' में दद्दू और 'शराबी' में मुंशीलाल के किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में बसे हुए हैं।


अपने करियर के अंतिम दिनों में, ओम प्रकाश स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे। 21 फरवरी 1998 को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। लेकिन उनके अभिनय के किस्से आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच जीवित हैं।