एल. सुब्रमण्यम: भारतीय शास्त्रीय संगीत के 'पगनिनी' की अनकही कहानी
संगीत की दुनिया में एक अद्वितीय नाम
नई दिल्ली, 22 जुलाई। कुछ कलाकार अपनी कला के माध्यम से पहचान बनाते हैं, जबकि अन्य अपनी कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाते हैं। एल. सुब्रमण्यम भी ऐसे ही एक कलाकार हैं, जिन्हें भारतीय शास्त्रीय संगीत का 'पगनिनी' कहा जाता है। संगीत के जरिए सत्य और सौंदर्य की खोज आज भी उनके जीवन का मुख्य उद्देश्य है। यही वजह है कि छह दशकों से अधिक के अपने करियर में, एल. सुब्रमण्यम को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संगीतकारों में गिना जाता है।
संगीत की जड़ों में पले-बढ़े
23 जुलाई 1947 को मद्रास (अब चेन्नई) में जन्मे लक्ष्मी नारायण सुब्रमण्यम एक ऐसे परिवार में बड़े हुए, जहां संगीत का गहरा प्रभाव था। उनके पिता, प्रोफेसर वी. लक्ष्मी नारायण, अपने समय के प्रमुख वायलिन वादकों में से एक थे। पिता केवल एक गुरु नहीं थे, बल्कि उन्होंने सुब्रमण्यम की प्रतिभा को पहचानकर उसे दिशा दी।
पिता की प्रेरणा और संघर्ष
एक इंटरव्यू में एल. सुब्रमण्यम ने कहा, "बड़े सपने देखो, उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करो और अपने काम के प्रति जुनूनी रहो। दृढ़ संकल्प और धैर्य आपको सफलता दिलाते हैं। मैं अपने पिता की तरह बनना चाहता था।" हालांकि, पिता के निधन ने उन्हें गहरे सदमे में डाल दिया। उन्होंने एक साल तक वायलिन नहीं छुआ। वह कहते हैं, "मेरे पिता ही मेरे गुरु थे। उनके जाने के बाद मैं इतना दुखी था कि मैंने वायलिन को हाथ नहीं लगाया।"
संगीत की यात्रा की शुरुआत
सुब्रमण्यम ने महज 5 साल की उम्र में वायलिन सीखना शुरू किया और 6 साल की उम्र में अपना पहला कॉन्सर्ट दिया। इसके बाद, उन्होंने कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ आर्ट्स से पश्चिमी शास्त्रीय संगीत में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। वह भारतीय और पश्चिमी शास्त्रीय संगीत दोनों में वायलिन बजाने में माहिर हो गए।
संगीत की दुनिया में योगदान
सुब्रमण्यम का संपर्क कई महान संगीतकारों से हुआ, और वह जल्द ही वायलिन वादन के उस्ताद बन गए। 25 साल की उम्र में उन्हें वायलिन चक्रवर्ती की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनके करियर में 200 से अधिक रिकॉर्डिंग शामिल हैं, और उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत के मंचों से लेकर अंतरराष्ट्रीय ऑर्केस्ट्रा और फिल्म संगीत तक अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। उनके संगीत का उपयोग 'सलाम बॉम्बे', 'मिसिसिपी मसाला' और 'लिटिल बुद्धा' जैसी फिल्मों में भी किया गया है।