ए.आर. रहमान: बॉलीवुड में गिरावट और संगीत की नई दिशा
संगीत का एक नया अध्याय
ए.आर. रहमान हिंदी सिनेमा में अमिताभ बच्चन के बाद सबसे महत्वपूर्ण शख्सियत माने जाते हैं। वह केवल एक संगीतकार नहीं, बल्कि एक 'सोनिक आर्किटेक्ट' हैं, जिन्होंने भारतीय फिल्म संगीत के स्वरूप को हमेशा के लिए बदल दिया है।
संगीत में कमी का खुलासा
1992 से 2015 तक, रहमान का नाम किसी भी एल्बम पर सफलता की निशानी माना जाता था। उनका संगीत एक पीढ़ी को परिभाषित करता था और गाने सांस्कृतिक गान बन जाते थे। हाल ही में, रहमान ने यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि पिछले आठ वर्षों में उनके पास बॉलीवुड में काम की कमी आई है, क्योंकि अब निर्णय उन लोगों के हाथ में हैं जो रचनात्मक नहीं हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत शिकायत नहीं, बल्कि पूरे उद्योग पर एक गंभीर आरोप था।
स्वयं की जिम्मेदारी
हालांकि, एक कड़वा सच यह है कि रहमान की इस गिरावट के लिए वह स्वयं भी जिम्मेदार हैं। 'तमाशा' (2015) के बाद उनका काम न केवल अस्थिर रहा है, बल्कि काफी हद तक भुला देने योग्य भी रहा है।
एक नई शुरुआत
रहमान से पहले, हिंदी फिल्म संगीत अपेक्षाकृत साधारण और नकल किया गया था। अनु मलिक, आनंद मिलिंद, और विजू शाह जैसे संगीतकारों ने न केवल अन्य देशों से, बल्कि इलैया राजा जैसे दिग्गजों से भी संगीत चुराया। बॉलीवुड ने विडंबना यह है कि रहमान की रचनाओं को चुराकर सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया।
संगीत का जादू
रोजा के साथ, भारत का संगीत परिदृश्य अचानक बदल गया। अगले दो दशकों तक, रहमान का नाम किसी भी एल्बम पर एक सांस्कृतिक गारंटी बन गया। उनके गाने हर घर, टैक्सी और शादी में गूंजने लगे। उनकी रचनाएँ लोगों के जीवन का साउंडट्रैक बन गईं।
गिरावट का दौर
लगभग उसी समय, उन्होंने ओके कनमणि के रीमेक ओके जानू के लिए अपने ही काम को फिर से प्रस्तुत किया। संगीत अच्छा था, लेकिन भुलाने लायक था। रहमान के वफादार प्रशंसकों के लिए, यह वह समय था जब उनकी औसत दर्जे की गिरावट शुरू हुई।