☰
×

आशा पारेख: बॉलीवुड की अनोखी कहानी और उनकी अनकही जिंदगी

आशा पारेख, जो 60 और 70 के दशक में अपनी खूबसूरती और अदाकारी के लिए जानी जाती थीं, ने कभी शादी नहीं की। उनके जन्मदिन पर, जानें उनके फिल्मी सफर, माता-पिता के निधन का असर, और नासिर हुसैन के साथ उनके रिश्ते के बारे में। आशा का करियर और उनके योगदान आज भी हिंदी सिनेमा में याद किए जाते हैं।
 

आशा पारेख का फिल्मी सफर

60 और 70 के दशक में अपनी अदाकारी और नृत्य के लिए जानी जाने वाली आशा पारेख ने भारतीय फिल्म उद्योग में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया। उन्होंने कई हिट फिल्मों में काम किया, लेकिन उनकी निजी जिंदगी में शादी का कोई अध्याय नहीं है। उनके जन्मदिन के अवसर पर, आइए उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं पर नजर डालते हैं।


डांस का जुनून बचपन से


आशा पारेख का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में हुआ। उनके पिता का नाम प्राणलाल पारेख और मां का नाम सलमा था। बचपन में, आशा डॉक्टर बनना चाहती थीं, लेकिन उनके डांस के प्रति प्रेम ने उन्हें मनोरंजन की दुनिया में खींच लिया। एक स्टेज शो में उनके नृत्य ने फिल्म निर्माता बिमल रॉय को प्रभावित किया, जिसके बाद उन्होंने महज 10 साल की उम्र में 1952 में फिल्म 'मां' में चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में काम किया।


17 साल की उम्र में लीड एक्ट्रेस बनीं

बाल कलाकार के रूप में अपने करियर की शुरुआत करने के बाद, आशा पारेख ने 17 साल की उम्र में लीड एक्ट्रेस के रूप में कदम रखा। 1959 में आई फिल्म 'दिल देकर देखो' में उन्होंने शम्मी कपूर के साथ काम किया, जो दर्शकों को बहुत पसंद आई। इसके बाद, उनके करियर ने तेजी से रफ्तार पकड़ी।


उन्होंने 'जब प्यार किसी से होता है', 'लव इन टोक्यो', 'कटी पतंग', 'कारवां', 'तीसरी मंजिल', 'आन मिलो सजना' और 'उपकार' जैसी कई सफल फिल्मों में अभिनय किया।


अपने समय की सबसे महंगी अभिनेत्री

आशा पारेख ने 1959 से 1973 के बीच कई हिट फिल्मों में लीड एक्ट्रेस के रूप में काम किया। उस समय, वह हिंदी सिनेमा की सबसे लोकप्रिय और महंगी अभिनेत्रियों में से एक थीं। उनके अभिनय के साथ-साथ उनके नृत्य को भी दर्शकों ने सराहा।


माता-पिता के निधन का असर


आशा अपने माता-पिता के बेहद करीब थीं। उनके निधन के बाद, वह एक कठिन भावनात्मक दौर से गुजरीं। 2017 में एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि माता-पिता के जाने के बाद उन्हें गहरा अकेलापन महसूस हुआ और आत्महत्या के विचार भी आए।


प्रशासनिक भूमिका में भी रहीं सक्रिय

फिल्मों में अपनी पहचान बनाने के बाद, आशा पारेख ने प्रशासनिक भूमिका भी निभाई। वह 1998 से 2001 तक केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की पहली महिला चेयरपर्सन रहीं।


सम्मान और पुरस्कारों से नवाजी गईं


आशा पारेख को 1970 में फिल्म 'कटी पतंग' के लिए फिल्मफेयर बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड मिला। इसके अलावा, उन्हें 1992 में पद्मश्री, 2002 में फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और 2022 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया।


निजी जीवन की चर्चा

आशा पारेख का नाम फिल्म निर्माता नासिर हुसैन के साथ जोड़ा जाता रहा है। उन्होंने अपनी आत्मकथा में इस रिश्ते का उल्लेख किया है। नासिर उस समय शादीशुदा थे, जिसके कारण उनका रिश्ता शादी तक नहीं पहुंच सका।


आशा पारेख ने कभी शादी नहीं की और आज भी अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी रही हैं। उनका फिल्मी करियर और भारतीय सिनेमा में योगदान उन्हें हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की यादगार अभिनेत्रियों में शामिल करता है।