असित सेन: हिंदी सिनेमा के हास्य सम्राट की अनोखी कहानी
असित सेन का अनोखा सफर
मुंबई, 12 मई। जब भी हम पुरानी हिंदी कॉमेडी फिल्मों की चर्चा करते हैं, असित सेन का नाम अवश्य आता है। उनकी आवाज़ और धीमी गति से बोले गए संवाद दर्शकों को हंसाने में माहिर थे। यह अद्भुत अंदाज किसी अभिनय कक्षा से नहीं, बल्कि उनके बचपन की एक याद से उत्पन्न हुआ।
कम ही लोग जानते हैं कि असित सेन ने अपनी विशेष धीमी संवाद शैली अपने एक नौकर से सीखी थी, जो बेहद धीरे-धीरे बात करता था। यही अंदाज बाद में उनकी पहचान बन गया और उन्होंने इसी शैली से हिंदी सिनेमा में एक अलग स्थान बना लिया।
असित सेन का जन्म 13 मई 1917 को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक बंगाली परिवार में हुआ। उनका परिवार पश्चिम बंगाल के बर्दवान से गोरखपुर आकर बस गया था। बचपन से ही असित का झुकाव कला और फोटोग्राफी की ओर था। उनके पिता विभिन्न व्यवसायों में लगे थे, लेकिन असित को कैमरे के साथ समय बिताना पसंद था। उन्होंने छोटी उम्र में ही लोगों की तस्वीरें खींचना शुरू कर दिया था और बाद में गोरखपुर में 'सेन फोटो स्टूडियो' खोला।
युवावस्था में असित सेन कोलकाता पहुंचे। उन्होंने परिवार को बताया कि वह पढ़ाई करने जा रहे हैं, लेकिन असल में उनका सपना फिल्म और थिएटर की दुनिया को करीब से देखना था। वहां उन्होंने नाटकों में अभिनय करना शुरू किया और मशहूर निर्देशक बिमल रॉय से मिले, जिन्होंने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें अपने साथ काम करने का अवसर दिया।
शुरुआत में असित सेन ने फिल्मों में कैमरे और प्रोडक्शन से जुड़े कार्य किए, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें छोटे अभिनय रोल मिलने लगे। उनकी असली पहचान तब बनी जब उन्होंने संवाद बोलने का एक अनूठा तरीका अपनाया। कहा जाता है कि उनके बचपन में एक नौकर था, जो बहुत धीरे-धीरे बोलता था। असित ने उसी अंदाज को अपनाया और जब उन्हें कॉमेडी रोल मिले, तो उन्होंने इसे और निखारा।
उनकी धीमी आवाज़ और रुक-रुक कर बोले गए संवाद दर्शकों को बेहद पसंद आए, और यही उनकी पहचान बन गई। फिल्म 'बीस साल बाद' में उनका 'गोपीचंद जासूस' का किरदार बेहद सफल रहा।
असित सेन ने अपने लंबे करियर में लगभग 250 फिल्मों में काम किया। 'आराधना', 'आनंद', 'अमर प्रेम', 'बॉम्बे टू गोवा', 'भूत बंगला', 'ब्रह्मचारी', 'मेरा गांव मेरा देश' और 'पूरब और पश्चिम' जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। उन्होंने 'परिवार' और 'अपराधी कौन' जैसी फिल्मों का निर्देशन भी किया। उस समय उन्हें 'हास्य सम्राट' कहा जाता था, और बड़े सितारे उनके साथ काम करना पसंद करते थे।
असित सेन की निजी जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। उनकी पत्नी मुकुल सेन उनके बेहद करीब थीं। जब उनकी पत्नी का निधन हुआ, तो असित सेन पूरी तरह टूट गए। पत्नी की मौत का दुख सहन न कर पाने के कारण उन्होंने 18 सितंबर 1993 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया।