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अभिनेता जीवन: नारद मुनि से लेकर खलनायक तक, जानें उनकी अनकही कहानी

अभिनेता जीवन, जिनका असली नाम ओमकार नाथ धर था, ने हिंदी सिनेमा में कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। 24 अक्टूबर को उनकी जयंती पर जानें उनके जीवन के संघर्ष, नारद मुनि के किरदार की खासियत और उनके परिवार के बारे में। जीवन ने 60 से अधिक बार नारद मुनि का किरदार निभाया और कई चर्चित फिल्मों में काम किया। उनका योगदान आज भी सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जीवित है।
 

जीवन का अद्वितीय सफर

हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम युग में कई ऐसे कलाकार हुए जिन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों के दिलों में एक विशेष स्थान बनाया। इनमें से एक प्रमुख नाम अभिनेता जीवन का है। उन्होंने कभी खलनायक की भूमिका निभाई, तो कभी नारद मुनि के रूप में दर्शकों का ध्यान खींचा। जीवन ने अपने करियर में 60 से अधिक बार नारद मुनि का किरदार निभाया। उनकी जयंती, 24 अक्टूबर, के अवसर पर आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।


कश्मीर में जन्म और संघर्ष की शुरुआत

अभिनेता जीवन का जन्म 24 अक्टूबर 1915 को जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में हुआ। उनका असली नाम ओमकार नाथ धर था। फिल्मों में कदम रखने के बाद उन्होंने जीवन नाम अपनाया और इसी नाम से हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाई। वह अभिनेता किरण कुमार के पिता भी थे।


जीवन की निजी जिंदगी प्रारंभ से ही संघर्षों से भरी रही। कहा जाता है कि जन्म के समय उनकी मां का निधन हो गया था और महज तीन साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को भी खो दिया। अभिनय की दुनिया में करियर बनाने का सपना लेकर जीवन 18 साल की उम्र में घर छोड़कर मुंबई चले गए। उस समय उनके पास केवल 26 रुपये थे। सीमित साधनों के बावजूद, उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने के लिए मेहनत की।


नारद मुनि का किरदार

जीवन के करियर की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में नारद मुनि का किरदार शामिल रहा। उन्होंने इस भूमिका को 60 से अधिक बार पर्दे पर निभाया। उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में 'हर हर महादेव' और 'भक्त ध्रुव' शामिल हैं। पौराणिक फिल्मों में नारद मुनि के रूप में उनकी उपस्थिति इतनी चर्चित हुई कि यह भूमिका उनकी पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गई।


अभिनय की शुरुआत और चर्चित फिल्में

जीवन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत 1935 में आई फिल्म 'फैशनेबल इंडिया' से की थी। इससे पहले, वह फिल्म इंडस्ट्री में रिफ्लेक्टर बॉय के रूप में काम कर चुके थे। धीरे-धीरे उन्होंने अभिनय में अपनी जगह बनाई और विभिन्न प्रकार के किरदार निभाए।


1950 से 1980 के दशक के बीच, जीवन हिंदी सिनेमा में सक्रिय रहे। उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ काम किया और उनकी चर्चित फिल्मों में 'अमर अकबर एंथनी', 'नसीब', 'धर्म वीर', 'जॉनी मेरा नाम', 'लावारिस', 'नया दौर', 'वक्त', 'संगम' और 'महाभारत' (1965) शामिल हैं।


परिवार और अंतिम समय

जीवन ने किरण धर से विवाह किया और उनके परिवार में दो बेटे—किरण कुमार और भूषण जीवन—और दो बेटियां निक्की व रिक्की थीं। उनके बेटे किरण कुमार ने भी अभिनय की दुनिया में अपना नाम बनाया।


जीवन का निधन 10 जून 1987 को हुआ। हालांकि वह अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन हिंदी सिनेमा में निभाए गए उनके किरदार, विशेषकर नारद मुनि की भूमिका, उन्हें आज भी यादगार बनाती है।