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अनुपम खेर ने मां के लिए खास तोहफे से साझा की भावनाएं, जानें क्या है कहानी!

अनुपम खेर ने अपनी मां को एक खास तोहफा दिया और इस मौके पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने माताओं की भावनाओं को सलाम किया। वीडियो में उनकी मां का रिएक्शन और घर का माहौल दर्शाया गया है, जो भारतीय मध्यम वर्गीय परिवारों की कहानी को बयां करता है। जानें इस दिलचस्प कहानी के बारे में और कैसे अनुपम ने मां की ममता को सराहा।
 

अनुपम खेर का मां के प्रति प्यार


मुंबई, 1 जून। भारतीय माताओं का स्वभाव हमेशा से ही प्यारा और व्यावहारिक रहा है। वे उपहारों को संभालकर रखने, परिवार में बांटने या खास अवसरों पर दूसरों को देने में माहिर होती हैं। अभिनेता अनुपम खेर ने अपनी मां को एक तोहफा देते हुए इसी विशेषता का जिक्र किया।


अनुपम खेर ने एक पोस्ट के माध्यम से सभी माताओं की भावनाओं को सलाम किया और बताया कि कैसे माताएं उपहारों को केवल वस्तु नहीं, बल्कि एक अनमोल याद के रूप में सहेजती हैं।


सोमवार को, अभिनेता ने अपनी मां के साथ एक विशेष वीडियो साझा किया। इंस्टाग्राम पर साझा किए गए इस वीडियो में, अनुपम अपनी मां दुलारी को एक हैंडबैग गिफ्ट करते हैं। जब उनकी मां बैग को देखती हैं, तो वह तुरंत उसकी कीमत पूछती हैं। अनुपम ने जवाब दिया कि यह किसी ने उनके लिए भेजा है। इसके बाद, उनकी मां बैग लेकर रैंप-वॉक करती हैं और उसे अपने कमरे में ले जाती हैं।


वीडियो के साथ उन्होंने लिखा, "मां को तोहफा देना थोड़ा जोखिम भरा होता है। क्योंकि अगर आपने उन्हें सुंदर शॉल, स्वेटर, साड़ी या पर्स दिया है, तो उसके इस्तेमाल की संभावना बहुत कम होती है। पहले वे उसे प्यार से देखेंगी, उसकी तारीफ करेंगी, सभी को दिखाएंगी और अंत में, उसे सुरक्षित स्थान पर रख देंगी ताकि शायद आने वाली पीढ़ियां भी उसे न ढूंढ सकें।"


उन्होंने मां की ममता की अहमियत पर जोर देते हुए कहा, "लेकिन असली मजा तोहफे में नहीं, बल्कि घर के माहौल में है।"


उन्होंने घर के मौजूदा माहौल का वर्णन करते हुए लिखा, "घर में सब कुछ चल रहा है। वृंदा सब संभाल रही है, प्रणीत हंस रहा है, मैं मां को तंग कर रहा हूं और मां अपने नए गिफ्ट के साथ रैंप-वॉक कर रही हैं।"


उन्होंने आगे कहा, "इस दौरान मुझे एहसास हुआ कि यह सिर्फ मेरा घर नहीं, बल्कि भारत के 90 प्रतिशत मध्यम वर्गीय घरों की कहानी है, जहां उपहारों से ज्यादा भावनाएं सहेजी जाती हैं, और जहां बच्चे बड़े हो जाने के बाद भी मां उनकी पसंद का खाना सोचती हैं।"