अनुपम खेर की 'तन्वी द ग्रेट' ने एक साल में बदली ऑटिज्म की सोच, जानें कैसे!
फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' का एक साल का सफर
मुंबई, 18 जुलाई। अभिनेता अनुपम खेर की फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' ने शनिवार को अपनी रिलीज के एक साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर, अनुपम ने फिल्म के सफर के बारे में अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस फिल्म का सबसे बड़ा पुरस्कार दुनिया भर में मिली सराहना नहीं, बल्कि यह था कि इसने परिवारों पर क्या प्रभाव डाला और लोगों की ऑटिज्म के प्रति सोच में कैसे बदलाव आया।
अनुपम खेर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने फिल्म के प्रभाव के बारे में चर्चा की। उन्होंने कमेंट सेक्शन में भी इस विषय पर लिखा, "आज हमारी फिल्म 'तन्वी द ग्रेट' को रिलीज हुए एक साल हो गया है। जब मैं इस अद्भुत सफर को देखता हूं, तो मेरा दिल कृतज्ञता से भर जाता है। यह फिल्म कई देशों में पहुंची, अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में भाग लिया और कई पुरस्कार जीते।"
अनुपम ने बताया कि फिल्म को कई पुरस्कार समारोहों में मान्यता मिली है। उन्होंने लिखा, "फिल्म का इंडियन पैनोरमा (आईएफएफआई) में चयन, फिप्रेसी अवॉर्ड से बेस्ट फीचर फिल्म का सम्मान, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ ऑस्ट्रेलिया में बेस्ट स्क्रीनप्ले और हमारी अद्भुत शुभांगी के लिए बेस्ट एक्ट्रेस और बेस्ट डेब्यू एक्ट्रेस जैसे कई सम्मान इस यात्रा को और भी खास बनाते हैं।"
हालांकि, अनुपम के लिए इन पुरस्कारों का महत्व फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं है। उन्होंने आगे कहा, "अगर आप मुझसे पूछें, तो इनमें से कोई भी इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि नहीं है। इस फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि वे हजारों संदेश हैं, जो हमें माता-पिता, शिक्षकों और युवाओं से मिले। किसी ने कहा कि अब वे ऑटिज्म को एक नई दृष्टि से देखते हैं। किसी ने लिखा कि उन्होंने अपने बच्चे को छिपाना बंद कर दिया है। किसी ने कहा कि इस फिल्म ने उन्हें अपने बच्चे को समझने की एक नई दृष्टि दी।"
अनुपम खेर द्वारा अभिनीत और निर्देशित 'तन्वी द ग्रेट' एक विशेष बच्ची की कहानी है, जो ऑटिज्म से पीड़ित है। अनुपम ने ऑटिज्म को एक 'सुपर पावर' के रूप में प्रस्तुत किया है और समाज को यह समझाने का प्रयास किया है कि ऑटिस्टिक बच्चे सामान्य बच्चों से किसी भी तरह से कम नहीं होते।