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अनु मलिक: संगीत की दुनिया में विवादों के बीच एक चमकता सितारा

अनु मलिक, एक प्रतिभाशाली संगीतकार, जिन्होंने महज सात साल की उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा, की कहानी है। उनके परिवार का संगीत में गहरा प्रभाव रहा है, और उन्होंने कई हिट गाने दिए हैं। हालांकि, अनु पर कई बार धुनें चुराने के आरोप भी लगे हैं। जानें उनकी यात्रा, विवाद और सफलता के बारे में इस लेख में।
 

संगीत की शुरुआत और परिवार का प्रभाव


नई दिल्ली, 1 नवंबर। यह कहानी है एक प्रतिभाशाली संगीतकार की, जिसने केवल सात साल की उम्र में अपने कौशल का प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। यह बालक, जिसे आज अनु मलिक के नाम से जाना जाता है, एक महान संगीतकार बनने की ओर अग्रसर था।


अनु मलिक का जन्म 2 नवंबर 1960 को हुआ, और उनके परिवार में संगीत का गहरा प्रभाव था, जिसने उनके जीवन को आकार दिया। उन्होंने एक बार कहा था, "मैं भाग्यशाली हूं कि मैं सरदार मलिक का बेटा हूं और मेरे मामा हसरत जयपुरी जैसे प्रसिद्ध गीतकार हैं।"


जब अनु ने एक मराठी कविता को संगीतबद्ध किया और अपने पिता को सुनाया, तो वह चकित रह गए। इसके बाद, अनु ने कई गानों की धुनें बनाने का परीक्षण किया, जिसे सुनकर उनके पिता बहुत खुश हुए।


कम उम्र में ही अनु ने गाने कंपोज करना शुरू कर दिया। जब उन्होंने अपने मामा के लिखे गाने को संगीतबद्ध किया, तो सभी ने उनकी प्रतिभा की सराहना की। 16-17 साल की उम्र में उन्हें बतौर संगीतकार काम करने का मौका मिला।


1978 में, फिल्म ‘हंटरवाली 77’ में अनु को अपने पिता की जगह काम करने का अवसर मिला। उनका पहला गाना, जिसे आशा भोसले ने गाया, ‘जुल्मों सितम पर इतराने वाले’ था। यह गाना उनके करियर की शुरुआत का प्रतीक बना।


फिल्म ‘बाजीगर’ में अनु मलिक के संगीत ने उन्हें नई पहचान दिलाई, और फिल्म ‘बॉर्डर’ में उनके सभी गाने हिट रहे। उन्हें फिल्म ‘रिफ्यूजी’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला।


हालांकि, अनु मलिक पर कई बार अंतरराष्ट्रीय और भारतीय गानों की धुनें चुराने के आरोप लगे। 2017 में एक शो के दौरान, रघु राम ने उनसे सीधे इस विषय पर सवाल किया। अनु ने जवाब देते हुए कहा कि ‘ईश्वर के अलावा कोई भी मौलिक नहीं है’ और प्रेरणा लेना चोरी से भिन्न है।