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अदिवि शेष ने काजीरंगा में रिजॉर्ट निर्माण पर उठाई चिंता, क्या है असम सरकार की योजना?

साउथ एक्टर अदिवि शेष ने असम सरकार से काजीरंगा में प्रस्तावित रिजॉर्ट निर्माण पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया। अदिवि ने कहा कि प्रकृति किसी की निजी संपत्ति नहीं है और हमें इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना चाहिए। जानें उनके विचार और चिंताएं इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर।
 

अदिवि शेष की अपील: काजीरंगा के इकोसिस्टम की सुरक्षा

मुंबई, 14 अक्टूबर। साउथ फिल्म इंडस्ट्री के अभिनेता अदिवि शेष ने असम सरकार से काजीरंगा के संवेदनशील पर्यावरण क्षेत्र में प्रस्तावित रिजॉर्ट के निर्माण पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विकास की योजनाओं में वन्यजीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय निवासियों की चिंताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।


अदिवि ने इस मुद्दे पर एक पत्र लिखकर राज्य सरकार से निर्माण के संभावित प्रभावों की समीक्षा करने और भूमि से संबंधित जानकारी में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।


उन्होंने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रकृति किसी की व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है, बल्कि मानव केवल एक समय के लिए इसका संरक्षक है।


अदिवि ने कहा, ''जब हम काजीरंगा की बात करते हैं, तो यह केवल एक नेशनल पार्क या पर्यटन स्थल नहीं है। यह एक जीवंत इकोसिस्टम है, जो पीढ़ियों से अस्तित्व में है। यह अनोखे वन्यजीवों का घर है और हमारी प्राकृतिक धरोहर है, जो हर भारतीय और पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है।''


उन्होंने काजीरंगा के इकोसिस्टम की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया, जो एक सींग वाले गैंडों के लिए प्रसिद्ध है। अदिवि ने कहा, ''एक सींग वाला गैंडा केवल असम की पहचान नहीं है, बल्कि यह हमारी जैव विविधता का प्रतीक है, जिसे बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।''


अदिवि ने चेतावनी दी कि जब किसी जानवर का प्राकृतिक आवास नष्ट होता है, तो उसका संतुलन बहाल करना बहुत कठिन हो जाता है।


उन्होंने सवाल उठाया, ''क्या हर भूमि का व्यावसायिक उपयोग करना आवश्यक है? क्या तात्कालिक लाभ वन्यजीवों और पर्यावरण को होने वाले दीर्घकालिक नुकसान से अधिक महत्वपूर्ण है? सस्टेनेबल टूरिज्म का मतलब है कि हमें प्रकृति का अनुभव बिना उसे नुकसान पहुंचाए करना चाहिए।''


अदिवि ने कहा कि उनकी चिंता केवल गैंडों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय समुदायों की भी है, जिनकी जीवनशैली और परंपराएं इस भूमि और प्रकृति से जुड़ी हुई हैं।


उन्होंने कहा, ''स्थानीय लोगों की आवाज़ और अनुभव को उन सभी निर्णयों में शामिल किया जाना चाहिए, जो उनके आसपास के क्षेत्र को प्रभावित करते हैं। यदि उन्हें चर्चा से बाहर रखा गया, तो संरक्षण की कोशिशें सफल नहीं हो सकेंगी।''


अदिवि ने असम सरकार से अपील की कि प्रस्तावित रिजॉर्ट के निर्माण के संभावित प्रभावों की सावधानीपूर्वक समीक्षा की जाए और सभी आवश्यक जानकारी साझा की जाए। उन्होंने कहा, ''किसी भी निर्णय से पहले पर्यावरण, कानून और स्थानीय समुदायों से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जानी चाहिए।''


उन्होंने अंत में कहा, ''काजीरंगा हमारी अनमोल प्राकृतिक धरोहर है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यहां के वन्यजीवों और स्थानीय लोगों की रक्षा करना हमारी जिम्मेदारी है। आज के निर्णय ही तय करेंगे कि हम भविष्य के लिए क्या छोड़कर जाएंगे।''