रवि किशन: संघर्ष से सफलता की कहानी, कैसे बने सांसद और फिल्म स्टार?
रवि किशन की प्रेरणादायक यात्रा
मुंबई, 16 जुलाई। रवि किशन की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने गांव की गलियों से निकलकर न केवल एक अभिनेता के रूप में पहचान बनाई, बल्कि सांसद भी बने। हिंदी और भोजपुरी सहित कई भाषाओं की फिल्मों में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया है। उनकी सफलता के पीछे एक लंबी संघर्ष की दास्तान है। बचपन में जब उन्होंने अभिनय का शौक अपनाया, तो परिवार की नाराजगी का सामना करना पड़ा, लेकिन यही शौक उन्हें देशभर में पहचान दिलाने में मददगार साबित हुआ।
रवि किशन का जन्म 17 जुलाई 1969 को मुंबई में हुआ। उनका असली नाम रविंद्र किशन शुक्ला है, और उनका परिवार उत्तर प्रदेश के जौनपुर से है। उनके पिता एक पुजारी थे और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। बचपन से ही रवि को नाटक और अभिनय में रुचि थी, और वह गांव की रामलीला में भाग लेते थे, कभी-कभी महिलाओं के किरदार भी निभाते थे।
रवि किशन ने कई बार कहा है कि उनके पिता को उनका यह शौक पसंद नहीं था। पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और एक स्थिर करियर चुनें। उन्हें लगता था कि अभिनय में कोई भविष्य नहीं है। कई बार उन्हें इसके लिए डांट भी सुननी पड़ी, लेकिन उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ।
एक समय ऐसा आया जब घर की स्थिति और पिता की नाराजगी से परेशान होकर रवि किशन मुंबई चले गए। वहां उन्होंने छोटे-छोटे काम किए और फिल्मों में अवसर पाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे। कई वर्षों तक संघर्ष करते हुए उन्होंने छोटे किरदारों में काम किया।
रवि किशन ने 1992 में हिंदी फिल्म 'पीतांबर' से अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने कई हिंदी फिल्मों में छोटे और बड़े रोल निभाए। 1990 के दशक में 'आर्मी', 'जख्मी दिल' और 'आग और चिंगारी' जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन उन्हें असली पहचान 2003 में आई फिल्म 'तेरे नाम' से मिली, जिसमें उन्होंने पुजारी का किरदार निभाया।
'तेरे नाम' के बाद उनकी पहचान बढ़ने लगी और उन्होंने भोजपुरी सिनेमा की ओर रुख किया। फिल्म 'सईंया हमार' ने उन्हें भोजपुरी सिनेमा का बड़ा सितारा बना दिया। इसके बाद उन्होंने कई सफल भोजपुरी फिल्में कीं और दर्शकों के बीच अपनी खास जगह बनाई। उन्होंने हिंदी के साथ-साथ तेलुगु और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया।
रवि किशन ने 'फिर हेरा फेरी', 'लक', 'रावण', 'एजेंट विनोद', 'बुलेट राजा', 'मुक्काबाज', 'बाटला हाउस' और 'लापता लेडीज' जैसी फिल्मों में भी काम किया। फिल्म 'लापता लेडीज' में उनके पुलिस अधिकारी के किरदार की काफी सराहना हुई, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर और आईफा अवार्ड में बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का पुरस्कार भी मिला।
फिल्मों के अलावा, रवि किशन ने टीवी पर भी अपनी पहचान बनाई। वह 'बिग बॉस' जैसे रियलिटी शो का हिस्सा रहे और कई कार्यक्रमों की मेज़बानी भी की। उन्होंने हॉलीवुड फिल्म 'स्पाइडर-मैन 3' के भोजपुरी डब वर्जन में अपनी आवाज भी दी।
अभिनय के बाद, रवि किशन ने राजनीति में कदम रखा और 2019 में गोरखपुर लोकसभा सीट से सांसद चुने गए। 2024 में उन्होंने फिर से जीत हासिल की। आज वह संसद और फिल्म उद्योग दोनों में सक्रिय हैं।